कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) नीति और उसकी भारी-भरकम फीस को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस व्यवस्था को छात्रों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि परीक्षा बोर्ड की गलतियों का खामियाजा देश के मासूम बच्चों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की कॉपियों की जांच में होने वाली गड़बड़ियों को सुधारने के नाम पर मोटी रकम वसूल रही है और इसे एक ‘कमाई का जरिया’ बना दिया गया है।
राहुल गांधी के हमले के मुख्य बिंदु
- अन्यायपूर्ण फीस ढांचा: राहुल गांधी ने कहा कि यदि किसी छात्र के नंबर बोर्ड की लापरवाही या मूल्यांकनकर्ता की गलती के कारण कम आते हैं, तो उसे अपनी कॉपी दोबारा चेक कराने के लिए प्रति विषय सैकड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह पूरी तरह से अनुचित है।
- गरीब छात्रों पर आर्थिक बोझ: उन्होंने चिंता व्यक्त की कि मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्र फीस न भर पाने के कारण री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन नहीं कर पाते। ऐसे में वे अपनी योग्यता के बावजूद पीछे छूट जाते हैं।
- सरकार पर मुनाफ़ाखोरी का आरोप: विपक्ष के नेता ने सरकार को घेरते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण होना चाहिए न कि छात्रों की मजबूरियों से राजस्व या मुनाफा कमाना।
कांग्रेस की मांग
राहुल गांधी ने मांग की है कि सीबीएसई को अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और जवाबदेह बनाना चाहिए। यदि किसी छात्र की कॉपी की री-चेकिंग में नंबर बढ़ते हैं, तो बोर्ड को न केवल उसकी पूरी फीस वापस (Refund) करनी चाहिए, बल्कि अपनी गलती के लिए खेद भी प्रकट करना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद किया जाए और इस फीस को तुरंत तार्किक या पूरी तरह मुफ्त किया जाए।


