भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार और भारत रत्न डॉ. बीआर आंबेडकर की 135वीं जयंती (14 अप्रैल 2026) के अवसर पर देश भर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य दिग्गज नेताओं ने बाबा साहेब को याद करते हुए उनके सामाजिक न्याय और समानता के संदेश को दोहराया।
प्रमुख नेताओं के संदेश
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: राष्ट्रपति ने संसद भवन परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष और सफलता की एक महान गाथा है। उन्होंने नागरिकों से उनके बताए ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बाबा साहेब को नमन किया। उन्होंने लिखा, “बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने अपना पूरा जीवन शोषितों और वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी विकसित भारत के संकल्प के लिए ऊर्जा का स्रोत हैं।” प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि उनकी सरकार ‘अंत्योदय’ के माध्यम से उनके सपनों को साकार कर रही है।
- गृह मंत्री अमित शाह: शाह ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने देश को एक ऐसा प्रगतिशील संविधान दिया जिसने अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी समान अवसर प्रदान किए।
विपक्ष और अन्य हस्तियों की प्रतिक्रिया
विपक्षी नेताओं ने भी बाबा साहेब की विरासत को याद किया और संविधान की रक्षा का संकल्प लिया:
- मल्लिकार्जुन खरगे: कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के जो स्तंभ स्थापित किए थे, उनकी रक्षा करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
- अन्य हस्तियां: विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और सामाजिक संगठनों ने भी कार्यक्रमों का आयोजन किया। बाबा साहेब की जन्मस्थली महू में विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहाँ हजारों की संख्या में अनुयायी जुटे।
सामाजिक न्याय का संदेश
इस वर्ष की जयंती का मुख्य केंद्र ‘समावेशी विकास’ और ‘डिजिटल साक्षरता’ के माध्यम से दलित और पिछड़े वर्गों का सशक्तिकरण रहा। देश के विभिन्न हिस्सों में संगोष्ठियों का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने बताया कि कैसे बाबा साहेब के आर्थिक और शैक्षिक विचार आज की 21वीं सदी की समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हैं।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से दी गई श्रद्धांजलि ने न केवल एक महान नेता को याद किया, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करने का संदेश भी दिया।


