इंदौर के स्टेडियम में एक बेहद अनोखा और सांस्कृतिक रंगों से भरा दृश्य देखने को मिला, जहाँ सफेद जर्सी की जगह भगवा चोले और धोती-कुर्ते में सजे साधु-संतों ने बल्ला थामा। इस ‘फ्रेंडली मैच’ का सबसे बड़ा आकर्षण प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर की तूफानी बल्लेबाजी रही, जिन्होंने मैदान के चारों ओर चौके-छक्कों की बरसात कर दी।
मैदान पर ‘धार्मिक’ क्रिकेट का रोमांच
इंदौर के प्रतिष्ठित मैदान पर साधु-संतों के बीच एक विशेष क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया। इस मैच का उद्देश्य सनातन संस्कृति के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस का संदेश देना था। मैदान पर सभी खिलाड़ी पारंपरिक वेशभूषा—धोती, कुर्ता और लंगोट—में नजर आए। माथे पर तिलक और हाथों में बल्ला थामे इन संतों को क्रिकेट खेलते देखना दर्शकों के लिए एक बिल्कुल नया अनुभव था।
देवकीनंदन ठाकुर की ‘विस्फोटक’ पारी
मैच के स्टार खिलाड़ी देवकीनंदन ठाकुर रहे। उन्होंने पेशेवर खिलाड़ियों के अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए मात्र 25 गेंदों पर 62 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी में कई ऊंचे छक्के और कलात्मक चौके शामिल थे। उनकी बल्लेबाजी को देखकर स्टेडियम में मौजूद लोग हैरान रह गए और तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
क्रिकेट की उत्पत्ति पर बड़ा दावा: ‘इंग्लैंड नहीं, पुराणों की देन’
मैच के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने एक दिलचस्प बयान दिया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट का खेल इंग्लैंड की देन नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें भारत के प्राचीन इतिहास और पुराणों में छिपी हैं।
- पुराणों का संदर्भ: उन्होंने दावा किया कि हमारे शास्त्रों में ‘गेंद-तड़ाक’ जैसे खेलों का वर्णन है, जो आधुनिक क्रिकेट का ही प्राचीन स्वरूप है।
- सांस्कृतिक पहचान: उनका कहना था कि अंग्रेजों ने हमारे ही खेलों को व्यवस्थित कर अपना नाम दे दिया है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति पर गर्व करें और इसे आधुनिक जीवनशैली के साथ जोड़ें।
आयोजन का उद्देश्य
- सनातन संस्कृति का प्रचार: यह दिखाना कि सनातन धर्म के अनुयायी और संत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खेल और आधुनिक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं।
- फिटनेस और खेलकूद: संतों ने संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है, और खेलकूद अनुशासन और ऊर्जा का संचार करते हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल
धोती-कुर्ते में क्रिकेट खेलते संतों के वीडियो और देवकीनंदन ठाकुर के छक्कों की क्लिप्स सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। नेटिजन्स इस अनोखे संगम की सराहना कर रहे हैं और इसे ‘भारतीयता और आधुनिकता का अद्भुत मेल’ बता रहे हैं।
यह मैच न केवल मनोरंजन का साधन बना, बल्कि इसने भारतीय खेलों के इतिहास और संस्कृति पर एक नई बहस भी छेड़ दी है।


