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सतलज को पायरेट करो और सब देखो, ये क्या बोल गए अनुराग कश्यप

मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक अनुराग कश्यप अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। अनुराग कश्यप ने नेटिजन्स (इंटरनेट यूजर्स) से खुलकर अपील की है कि वे दिलजीत दोसांझ की नई फिल्म ‘सतलज’ (Satluj) को पाइरेट (Pirate) करके देखें।

सेंसरशिप और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के रवैये से परेशान होकर अनुराग कश्यप का यह गुस्सा फूटा है।

🚫 ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाई गई फिल्म ‘सतलज’

दरअसल, पंजाबी रॉकस्टार दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलज’ को रिलीज के कुछ ही समय बाद एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। फिल्म में पंजाब के कुछ बेहद संवेदनशील और वास्तविक मुद्दों को दिखाया गया है, जिसके चलते इसे विवादों और सेंसरशिप का सामना करना पड़ा।

फिल्म को प्लेटफॉर्म से अचानक हटाए जाने के फैसले से सिनेमा जगत के कई लोग हैरान और आक्रोशित हैं। अनुराग कश्यप का मानना है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है और ऐसी महत्वपूर्ण कहानियों को दर्शकों तक पहुंचने से रोका नहीं जाना चाहिए।

💥 ‘प्लीज सतलज देखो, पायरेट करो…’

फिल्म को हटाए जाने के विरोध में अनुराग कश्यप ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट साझा की, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। उन्होंने लिखा:

“प्लीज सतलज देखो, पायरेट करो और सब देखो। यह एक ऐसी फिल्म है जिसे हर किसी को देखना चाहिए। अगर वे (ओटीटी प्लेटफॉर्म) इसे आधिकारिक तौर पर आपको नहीं देखने दे रहे हैं, तो इसे ढूंढने के अन्य तरीके अपनाएं, लेकिन इसे मिस मत करें।”

आमतौर पर फिल्म मेकर्स पाइरेसी (फिल्मों की चोरी) के खिलाफ अभियान चलाते हैं क्योंकि इससे करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। ऐसे में एक स्थापित फिल्म मेकर द्वारा खुद पाइरेसी को बढ़ावा देने की बात कहना यह दर्शाता है कि वे सिस्टम और सेंसरशिप से किस कदर हताश हो चुके हैं।

🗣️ सोशल मीडिया पर बंटी जनता की राय

अनुराग कश्यप के इस तीखे बयान के बाद इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है:

  • सपोर्ट में उतरे लोग: कई सिनेमा प्रेमियों और प्रशंसकों ने अनुराग के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि जब बेहतरीन कला को दबाने की कोशिश की जाती है, तो उसे देखने के लिए ऐसे ही विद्रोही कदम उठाने पड़ते हैं।
  • आलोचना करने वाले: वहीं, फिल्म इंडस्ट्री के एक वर्ग और कुछ कानून विशेषज्ञों ने इस बयान की आलोचना की है। उनका तर्क है कि एक जिम्मेदार फिल्म मेकर होने के नाते पाइरेसी जैसी अवैध गतिविधि का समर्थन करना गलत मिसाल कायम करता है।

दिलजीत दोसांझ की ‘सतलज’ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब महज एक फिल्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कंटेंट की आजादी और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की सेंसरशिप नीतियों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

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