भारतीय राजनीति के लिहाज से 2026 का मानसून सत्र बेहद नाटकीय और समीकरण बदलने वाला साबित हो रहा है। विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के दो बड़े दलों— तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे – UBT) में संसद के भीतर हुई बड़ी टूट ने राष्ट्रीय राजनीति की पूरी अंकगणित को पलट कर रख दिया है।
इस सियासी भूचाल का सबसे बड़ा असर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर क्षेत्रीय क्षत्रपों— तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) की मोलभाव करने की शक्ति (Bargaining Power) पर पड़ा है।
संसद का बदला अंकगणित: क्यों खिसके TDP और JDU?
साल 2024 के लोकसभा चुनावों में जब भाजपा 240 सीटों पर सिमट गई थी, तब चंद्रबाबू नायडू की TDP (16 सीटें) और नीतीश कुमार की JDU (12 सीटें) एनडीए सरकार के अस्तित्व के लिए ‘किंगमेकर’ बनकर उभरे थे। बजट से लेकर नीतियों तक में आंध्र प्रदेश और बिहार की गहरी छाप दिखने लगी थी। लेकिन विपक्षी खेमे में हुई दो बड़ी बगावत ने भाजपा की निर्भरता इन दोनों दलों पर बहुत कम कर दी है:
- TMC में बड़ी टूट: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी सांसदों ने एक अलग गुट बना लिया और वे ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में शामिल हो गए हैं। इस गुट ने एनडीए सरकार को मुद्दों पर आधारित समर्थन देने का एलान किया है।
- शिवसेना (UBT) का बिखराव: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने पाला बदल लिया और वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (एनडीए घटक दल) के साथ आ गए हैं।
नया स्थान समीकरण (Ranking Shift): एनडीए के सहयोगी दलों के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में इस बदलाव के बाद, 20 सांसदों के साथ TMC का बागी गुट (NCPI) दूसरे स्थान पर आ गया है। इसके चलते TDP तीसरे स्थान पर और JDU खिसककर पांचवें स्थान पर पहुंच गई है (शिंदे गुट की शिवसेना 14 सांसदों के साथ चौथे स्थान पर आ गई है)।
NDA-इंडिया ब्लॉक के समीकरणों पर असर
विपक्ष के कमजोर होने और सत्तापक्ष के मजबूत होने के इस पूरे घटनाक्रम ने तीन बड़े राजनीतिक बदलाव किए हैं:
- भाजपा की ‘एक्सक्लूसिव’ निर्भरता खत्म: अब भाजपा केवल TDP या JDU के भरोसे नहीं है। यदि भविष्य में किसी नीति याDelimitation (परिसीमन) जैसे जटिल मुद्दे पर TDP या JDU पीछे हटते हैं, तो भाजपा के पास TMC के बागी गुट (20 सांसद) और शिंदे गुट (14 सांसद) का एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार है।
- इंडिया ब्लॉक को करारा झटका: संसद में विपक्ष की ताकत अचानक घट गई है। 26 सांसदों के नुकसान के बाद लोकसभा में सरकार के पास अब 318 से अधिक सांसदों का सीधा या परोक्ष समर्थन दिख रहा है। राज्यसभा में भी विपक्ष कमजोर हुआ है, जिससे सरकार को मुश्किल बिल पास कराने में आसानी होगी।
- क्षेत्रीय दलों का ‘घरेलूकरण’ (Domestication): राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने चतुराई से सहयोगियों के नए केंद्र बनाकर नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं को गठबंधन के भीतर संतुलित कर दिया है।
संविधान संशोधन की चुनौती: हालांकि, इस नए गणित के बावजूद भाजपा को बड़े संवैधानिक बदलावों (जैसे लोकसभा सीटों का नए सिरे से निर्धारण यानी परिसीमन) के लिए दो-तिहाई बहुमत (360 सांसद) की आवश्यकता होगी। इसलिए TDP और JDU का महत्व पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन गठबंधन के भीतर उनकी जो “एकमात्र अपरिहार्यता” थी, वह अब समाप्त हो गई है।


