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    ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दिख रहे निशान, सरगोधा एयरबेस की मरम्मत करा रहा पाकिस्तान

    भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लगभग 16 महीने (490 दिन) बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान भारत के सटीक और घातक मिसाइल हमलों से हुए नुकसान को पूरी तरह से ठीक नहीं कर पाया है। स्पेस टेक कंपनी वैंतोर (Vantor) की हालिया हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित महत्वपूर्ण एयरबेस PAF बेस मुशफ (सरगोधा एयरबेस) के रनवे और टैक्सी-ट्रैक पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर री-सरफेसिंग और खुदाई का काम शुरू किया गया है।

    अस्थायी पैचवर्क साबित हुआ नाकाम

    10 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय वायुसेना की ब्रह्मोस मिसाइल और अन्य सटीक हथियारों ने सरगोधा एयरबेस के मुख्य 3,200 मीटर लंबे रनवे पर हमला किया था। इस हमले से रनवे पर करीब 8 से 9 मीटर चौड़ा और 4 से 5 मीटर गहरा विशाल गड्ढा बन गया था।

    हमले के कुछ ही हफ्तों बाद पाकिस्तानी वायुसेना ने संचालन बहाल करने के लिए लगभग 50 फीट चौड़े आयताकार अस्थायी पैचवर्क (Rapid Runway Repair) से गड्ढों को ढक दिया था। हालांकि, भारी सैन्य लड़ाकू विमानों की आवाजाही, मानसून और कंक्रीट की अंदरूनी संरचना के कमजोर होने के कारण यह अस्थायी पैच पूरी तरह विफल हो गया। सैटेलाइट विश्लेषण के अनुसार, अब उस पुराने पैच को पूरी तरह हटाकर गड्ढों को फिर से गहराई तक खोदा गया है ताकि स्थायी री-सरफेसिंग की जा सके।

    क्यों बेहद खास है सरगोधा एयरबेस?

    सरगोधा एयरबेस पाकिस्तान के सेंट्रल एयर कमांड का मुख्यालय है और लाहौर से लगभग 172 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यह एयरबेस पाकिस्तान के प्रमुख लड़ाकू विमानों जैसे F-16, JF-17, और मिराज-III/5 स्क्वाड्रन का ठिकाना है।

    इसके अलावा, यह बेस रणनीतिक रूप से संवेदनशील ‘किराना हिल्स’ से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसे पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और हथियारों के भंडारण से जोड़ा जाता रहा है।

    लाखों डॉलर का खर्च और ठप उड़ानों का संकट

    रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व सैन्य अधिकारियों के अनुसार, रनवे की पूरी री-सरफेसिंग की प्रक्रिया में पाकिस्तान को 80 लाख से 1 करोड़ डॉलर (लगभग $8-10 मिलियन) का भारी खर्च उठाना पड़ सकता है। इस मरम्मत कार्य में 30 से 45 दिनों का समय लगेगा, जिस दौरान रनवे से किसी भी प्रकार के फाइटर जेट की उड़ान संभव नहीं होगी।

    यह घटना न केवल भारतीय वायुसेना और ब्रह्मोस मिसाइल की अचूक मारक क्षमता और प्रभावशीलता को प्रमाणित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत के सामरिक प्रहार का असर पाकिस्तान के रक्षा बुनियादी ढांचे पर लंबे समय तक बना हुआ है।

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