बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज का समापन एक बड़े विवाद के साथ हुआ। मीरपुर में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मैच में बांग्लादेश ने पाकिस्तान को 11 रन से हराकर 2-1 से सीरीज जीत ली। 11 साल बाद बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज हारने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम और बोर्ड काफी गुस्से में है और उन्होंने मैच रेफरी के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।
विवाद की जड़: आखिरी ओवर का ‘ड्रामा’
यह विवाद मैच के आखिरी ओवर की 5वीं गेंद पर हुआ, जब पाकिस्तान को जीत के लिए 2 गेंदों में 12 रनों की जरूरत थी।
- अंपायर का फैसला: रिशाद हुसैन की गेंद पर मैदानी अंपायर कुमार धर्मसेना ने उसे ‘वाइड’ करार दिया।
- बांग्लादेश का रिव्यू (DRS): वाइड करार दिए जाने के बाद बांग्लादेश ने LBW के लिए रिव्यू लिया। थर्ड अंपायर ने पाया कि गेंद बल्ले के निचले हिस्से (UltraEdge पर स्पाइक) से छूकर निकली थी, इसलिए वाइड का फैसला पलट दिया गया। इससे पाकिस्तान की जीत की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं।
पाकिस्तान की शिकायत के मुख्य बिंदु
पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट ने मैच रेफरी नीयामुर राशिद के पास जो औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है, उसके पीछे मुख्य आधार ये हैं:
- बड़ी स्क्रीन पर रिप्ले का प्रभाव: पाकिस्तान का आरोप है कि बांग्लादेश ने रिव्यू तब लिया जब स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर गेंद का रिप्ले दिखाया जा चुका था। नियम के अनुसार, खिलाड़ियों को रिप्ले देखकर रिव्यू लेने का निर्णय नहीं लेना चाहिए।
- समय सीमा का उल्लंघन: आईसीसी के नियमों के अनुसार, रिव्यू लेने के लिए खिलाड़ियों के पास केवल 15 सेकंड का समय होता है। पाकिस्तान का मानना है कि बांग्लादेश ने इस तय समय सीमा के बाद रिव्यू मांगा।
- अंपायर की भूमिका पर सवाल: पाकिस्तानी खेमा अंपायर कुमार धर्मसेना के इस फैसले से नाराज है कि उन्होंने समय सीमा समाप्त होने या रिप्ले दिखाए जाने के बाद भी रिव्यू की अनुमति दी।
पाकिस्तान की मांग है कि इस प्रक्रियात्मक गलती को स्वीकार किया जाए। हालांकि मैच का परिणाम नहीं बदलेगा, लेकिन पीसीबी इस मामले में भविष्य के लिए कड़ा रुख अपनाना चाहता है।


