पश्चिम एशिया में चल रहे भीषण तनाव के बीच, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक नई और बेहद सख्त रणनीति का आगाज किया है, जिसे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ (Operation Economic Fury) नाम दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने तेहरान को घुटनों पर लाने के लिए सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ ‘आर्थिक युद्ध’ को तेज कर दिया है।
क्या है ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’?
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने इस रणनीति को “वित्तीय बमबारी” (Financial Equivalent of a Bombing Campaign) करार दिया है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- तेल निर्यात पर कड़ा प्रहार: अमेरिका ने ईरान के तेल उद्योग से जुड़े दो दर्जन से अधिक व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसका उद्देश्य ईरान के राजस्व के सबसे बड़े स्रोत को पूरी तरह सुखाना है।
- सेकेंडरी प्रतिबंधों की धमकी: अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि चीन, भारत, ओमान और यूएई जैसे जो भी देश या बैंक ईरानी तेल खरीदेंगे या उनके फंड का प्रबंधन करेंगे, उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा।
- वेवर (छूट) खत्म: अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल की खरीद के लिए दी गई अस्थायी प्रतिबंध छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों पर भी दबाव बढ़ेगा।
होर्मुज की नाकेबंदी और बातचीत का दबाव
यह आर्थिक दबाव ऐसे समय में डाला जा रहा है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘बंधक’ बना रखा है।
- ब्लॉकचेन और नौसेना: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि पिछले 48 घंटों में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण कोई भी जहाज ईरानी बंदरगाहों तक नहीं पहुंच सका है।
- दो शर्तें: अमेरिका ने बातचीत की मेज पर लौटने के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी हैं: पहला, ईरान होर्मुज के रास्ते को पूरी तरह से खोले, और दूसरा, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पास अंतिम समझौते के लिए पूर्ण अधिकार हों।
- युद्धविराम की समाप्ति: वर्तमान में चल रहा दो सप्ताह का युद्धविराम अगले सप्ताह समाप्त हो रहा है। यदि पाकिस्तान की मध्यस्थता में होने वाली वार्ता विफल रहती है, तो अमेरिका ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ को और अधिक आक्रामक रूप में लागू करेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस “फुल फोर्स” आर्थिक रणनीति से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। ट्रेजरी विभाग ने साफ कर दिया है कि वे अब ईरान के “अभिजात वर्ग” (Regime Elites) को निशाना बना रहे हैं जो ईरानी जनता की कीमत पर लाभ कमा रहे हैं।
अमेरिका की यह रणनीति स्पष्ट संकेत है कि वह अब केवल मिसाइलों से ही नहीं, बल्कि डॉलर और प्रतिबंधों की ताकत से ईरान की कमर तोड़ना चाहता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली अगली दौर की वार्ता पर टिकी हैं।


