तमिलनाडु में सरकार गठन की खींचतान के बीच ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के अंदर एक बड़ी दरार उभरकर सामने आई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी राजा ने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने के कांग्रेस के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।
डी राजा का कड़ा प्रहार
डी राजा ने इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए सीधे तौर पर कांग्रेस की रणनीति को निशाने पर लिया है:
- इंडी गठबंधन में फूट: राजा ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस द्वारा डीएमके (DMK) का साथ छोड़कर अचानक टीवीके को समर्थन देना ‘इंडिया’ गठबंधन की एकता के लिए घातक है। उन्होंने इसे गठबंधन के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया।
- कांग्रेस अपनी गलती देखे: सीपीआई नेता ने कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण (Introspect) करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बिना किसी ठोस चर्चा के यह कदम उठाया, जिससे राज्य में धर्मनिरपेक्ष ताकतों के बीच भ्रम पैदा हुआ है।
- लोकतांत्रिक मर्यादा: राजा का तर्क है कि हालांकि टीवीके सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन गठबंधन के पुराने साथियों को दरकिनार करना भविष्य के लिए सही संकेत नहीं है।
क्या है विवाद की जड़?
2026 के विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है:
- विजय की TVK: 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत (118) से 10 सीटें दूर है।
- कांग्रेस का रुख: कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों का समर्थन विजय को देने का ऐलान कर दिया, जिससे डीएमके नेतृत्व वाला गठबंधन कमजोर हो गया।
- वामपंथी दलों की दुविधा: सीपीआई और सीपीआई(एम) (दो-दो विधायक) ने भी बाद में ‘धर्मनिरपेक्ष सरकार’ और ‘जनादेश के सम्मान’ के नाम पर टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया, लेकिन डी राजा इस पूरी प्रक्रिया में कांग्रेस की “एकतरफा” भूमिका से असंतुष्ट हैं।
राजनीतिक समीकरण: 118 का जादुई आंकड़ा
विजय ने अब बहुमत जुटा लिया है, लेकिन इसके पीछे गठबंधन की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है:
- समर्थन का गणित: TVK (107*) + कांग्रेस (5) + CPI (2) + CPM (2) + VCK (2) = 118 सीटें।
- (विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता था, एक सीट छोड़ने के बाद उनकी व्यक्तिगत सीटें 107 मानी जा रही हैं)
डी राजा का यह बयान दर्शाता है कि तमिलनाडु में भले ही विजय की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया हो, लेकिन विपक्षी खेमे और ‘इंडिया’ गठबंधन के भीतर अविश्वास की खाई चौड़ी हो गई है। कांग्रेस और डीएमके के बीच दशकों पुराने रिश्तों में आई यह दरार आने वाले लोकसभा चुनावों पर भी असर डाल सकती है।


