इस्लामाबाद शांति वार्ता के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के ताजा दावे ने कूटनीतिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। अराघची का आरोप है कि जब पाकिस्तान में शांति की कोशिशें अंतिम दौर में थीं, ठीक उसी समय इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच हुई एक फोन कॉल ने पूरी स्थिति को बदल कर रख दिया। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बड़ा झटका दिया है।
अराघची का दावा और फोन कॉल का विवाद
ईरानी विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, इस्लामाबाद में चल रही उच्च स्तरीय चर्चाओं के दौरान इजरायल के हस्तक्षेप ने अमेरिका की प्राथमिकताओं को बदल दिया।
- प्राथमिकताओं में बदलाव: अराघची का कहना है कि नेतन्याहू ने वेंस को फोन कर ईरान पर सख्त कार्रवाई के लिए दबाव बनाया। इसके तुरंत बाद, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का रुख कड़ा हो गया, जिससे वार्ता बेनतीजा खत्म होने की कगार पर पहुँच गई।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: ईरान ने इसे एक “साजिश” करार दिया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करने के बजाय उसे और भड़काना है।
अमेरिका और इजरायल का पक्ष
हालांकि अमेरिका ने इस फोन कॉल की आधिकारिक पुष्टि को ‘नियमित संवाद’ का हिस्सा बताया है, लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बातचीत का समय बेहद महत्वपूर्ण था।
- इजरायल लगातार यह तर्क देता रहा है कि ईरान पर केवल कड़े प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के जरिए ही लगाम कसी जा सकती है।
- अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की घोषणा को इसी ‘बदली हुई प्राथमिकता’ का हिस्सा माना जा रहा है।
वैश्विक प्रतिक्रिया
इस खुलासे के बाद खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदायों के बीच चिंता बढ़ गई है। रूस और चीन ने शांति वार्ता में बाहरी हस्तक्षेप की आलोचना की है, जबकि मध्यस्थता कर रहे देशों के लिए अब दोनों पक्षों को दोबारा मेज पर लाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ईरान का आरोप है कि इजरायल ने अमेरिकी फैसलों को प्रभावित किया। शांति वार्ता की विफलता के तुरंत बाद अमेरिका ने ‘नाकाबंदी’ जैसा सख्त कदम उठाया। जेडी वेंस और नेतन्याहू की कथित बातचीत अब वैश्विक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।


