भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (2026) के अवसर पर नई दिल्ली के ‘कर्तव्य पथ’ ने एक बार फिर इतिहास रचा। इस वर्ष का उत्सव न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक साख और ‘विकसित भारत’ के संकल्प का जीवंत प्रतिबिंब भी रहा।
यहाँ परेड की प्रमुख झलकियां और मुख्य आकर्षण दिए गए हैं:
1. मुख्य अतिथि और गौरवमयी उपस्थिति
इस वर्ष का गणतंत्र दिवस विशेष रहा क्योंकि इसमें दो मुख्य अतिथि शामिल हुए—यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पारंपरिक बग्गी में बैठकर कर्तव्य पथ पर दस्तक दी, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया।
2. ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष: मुख्य थीम
परेड की मुख्य थीम ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ रही। कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित चित्रों, गीतों और झांकियों में राष्ट्रीय गीत की विरासत को आधुनिक प्रगति के साथ जोड़कर दिखाया गया।
3. सैन्य शक्ति का आधुनिक स्वरूप
भारतीय सेना ने इस बार ‘बैटल एरे’ (Battle Array) फॉर्मेशन में मार्च किया, जो युद्ध के मैदान की तैयारियों को दर्शाता है।
- सूर्यास्त्र (Suryastra): स्वदेशी ‘यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ का पहली बार प्रदर्शन हुआ, जो 300 किमी तक सटीक मार करने में सक्षम है।
- भैरव लाइट कमांडो: नई गठित इस बटालियन ने पहली बार परेड में हिस्सा लिया, जो दुर्गम इलाकों में त्वरित कार्रवाई के लिए जानी जाती है।
- नारी शक्ति: पहली बार एक महिला अधिकारी, असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला, ने 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व कर इतिहास रचा।
4. झांकियों में संस्कृति के दर्शन
कुल 30 झांकियों ने कर्तव्य पथ की शोभा बढ़ाई (17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 13 मंत्रालयों से)।
- इन झांकियों में असम के चाय बागान से लेकर राजस्थान के किलों और आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित ‘गगनयान’ व ‘चंद्रयान’ के मॉडलों को दर्शाया गया।
- एनिमल कंटिंजेंट: विशेष रूप से तैयार ऊंटों (Bactrian camels) और जांस्करी घोड़ों की टुकड़ी ने सबका ध्यान खींचा।
5. आसमान में ‘सिंदूर फॉर्मेशन’
वायुसेना के फ्लाईपास्ट में 29 विमानों ने हिस्सा लिया। आकर्षण का केंद्र ‘सिंदूर फॉर्मेशन’ रहा, जिसमें राफेल, सुखोई-30 और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता और वायु शक्ति का प्रदर्शन करते हुए आसमान को तिरंगे के रंगों से भर दिया।
इस बार परेड स्थलों (enclosures) के नाम नदियों (गंगा, नर्मदा, कावेरी आदि) पर रखे गए थे, जिससे वीआईपी कल्चर को खत्म कर आम जनता और संस्कृति को सम्मान दिया गया।


