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LPG और ईंधन संकट पर चर्चा की मांग, राहुल बोले, अब मंत्रियों की सहमति अनिवार्य?

लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने गुरुवार को सरकार की विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने एलपीजी और ईंधन संकट को लेकर चर्चा की मांग करते हुए इसे देश के सामने आने वाला एक बड़ा खतरा बताया।

संसदीय प्रक्रिया पर सवाल

राहुल गांधी ने सदन में एक नई प्रक्रिया पर आपत्ति जताई, जिसमें बहस से पहले मंत्रियों की सहमति अनिवार्य की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था चर्चा को सीमित करती है और विपक्षी आवाज को दबाने का प्रयास है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) के साथ समझौता किया गया है। उन्होंने कहा, “गलत विदेश नीति के कारण आज भारत एक बड़ी समस्या की ओर बढ़ रहा है।” उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को ईरान के निर्णय से कहीं बड़ा वैश्विक मुद्दा करार दिया।

  • बड़े संकट की चेतावनी: विपक्ष के नेता ने दावा किया कि दुनिया एक बहुत ही अस्थिर दौर में प्रवेश कर रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो करोड़ों भारतीयों को भारी आर्थिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने इसे कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक ‘दूरदर्शी चेतावनी’ बताया।
  • प्रधानमंत्री पर निशाना: राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यक्षमता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “समस्या यह है कि प्रधानमंत्री काम नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे कहीं फंस गए हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे अपनी सोच बदलें और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत युद्धस्तर पर तैयारी शुरू करें।

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तनाव के चलते तेल आपूर्ति श्रृंखला बाधित है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे इसे दलीय राजनीति से ऊपर उठकर एक राष्ट्रीय संकट के रूप में देखें और जनता को सुरक्षा प्रदान करें।

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