प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें संस्करण के जरिए राष्ट्र को संबोधित किया। इस एपिसोड में पीएम मोदी ने भारत की बढ़ती ऊर्जा शक्ति, वैज्ञानिक उपलब्धियों और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे उदाहरणों पर विशेष चर्चा की।
पवन ऊर्जा: भारत के विकास की ‘अदृश्य’ शक्ति
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए पवन ऊर्जा (Wind Energy) को देश की प्रगति का एक बड़ा आधार बताया।
- अदृश्य ताकत: पीएम ने पवन शक्ति को एक ऐसी ‘अदृश्य शक्ति’ कहा जिसके बिना आधुनिक भारत की कल्पना करना कठिन है।
- नई उपलब्धि: उन्होंने बताया कि भारत ने हाल ही में पवन ऊर्जा उत्पादन में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, जो न केवल हमारे औद्योगिक विकास को गति दे रही हैं, बल्कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी मदद कर रही हैं।
सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम: राष्ट्र निर्माण का आधार
विज्ञान और तकनीक को देश की प्रगति से जोड़ते हुए पीएम मोदी ने भारतीय वैज्ञानिकों की सराहना की।
- बहुआयामी लाभ: पीएम के अनुसार, भारत का सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसका लाभ स्वास्थ्य क्षेत्र, औद्योगिक विकास और कृषि तक पहुंच रहा है।
- आधुनिक इनोवेटर्स: न्यूक्लियर प्रोग्राम ने देश के आधुनिक इनोवेटर्स के लिए नई राहें खोली हैं, जिससे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया और अधिक सशक्त हुई है।
कच्छ का रण: ‘लाखा जी के बाराती’ और पर्यावरण प्रेम
प्रधानमंत्री ने गुजरात के कच्छ के रण की जैव-विविधता और स्थानीय संस्कृति का एक बेहद सुंदर उदाहरण पेश किया।
- फ्लैमिंगो सिटी: पीएम ने बताया कि बरसात के बाद कच्छ की धरती लाखों गुलाबी फ्लैमिंगो (Flamingos) के आगमन से जीवंत हो उठती है। यही कारण है कि इस इलाके को ‘फ्लैमिंगो सिटी’ कहा जाता है।
- अनूठा नाम: स्थानीय लोग इन विदेशी पक्षियों को ‘लाखा जी के बाराती’ कहकर पुकारते हैं।
- संरक्षण का प्रतीक: ये पक्षी न केवल कच्छ की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि वहां के लोगों के लिए पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा प्रतीक बन गए हैं। कच्छ के निवासी इन मेहमानों का स्वागत अपनों की तरह करते हैं, जो भारत के जीव-प्रेम को दर्शाता है।
‘मन की बात’ के इस एपिसोड के माध्यम से प्रधानमंत्री ने संदेश दिया कि भारत एक ओर जहाँ परमाणु और पवन ऊर्जा जैसी आधुनिक शक्तियों में विश्व पटल पर अग्रणी बन रहा है, वहीं दूसरी ओर अपनी पारंपरिक संस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों को सहेजने में भी पीछे नहीं है। उन्होंने युवाओं से विज्ञान और पर्यावरण के प्रति अपनी रुचि बढ़ाने का आह्वान किया।


