भारतीय सेना और पूरे देश के लिए एक बेहद गर्व का क्षण सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने लेबनान में शांति मिशन के दौरान महिलाओं और किशोरियों की मदद के लिए भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक को साल 2025 के प्रतिष्ठित ‘संयुक्त राष्ट्र सैन्य लिंग अधिवक्ता पुरस्कार’ (UN Military Gender Advocate of the Year Award) के लिए चुना है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान वैश्विक स्तर पर महिला सशक्तिकरण और शांति स्थापना में भारत के योगदान को रेखांकित करता है।
लेबनान में बनीं महिलाओं की मददगार
मेजर अभिलाषा बराक वर्तमान में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) में भारतीय बटालियन के साथ फीमेल एंगेजमेंट टीम (FET) की कमांडर के रूप में कार्यरत हैं।
- अभूतपूर्व योगदान: उन्होंने पश्चिम एशियाई देश लेबनान में अपनी तैनाती के दौरान स्थानीय महिलाओं और किशोरियों के साथ सामुदायिक जुड़ाव और आउटरीच गतिविधियों में उत्कृष्ट काम किया है।
- शांति सैनिकों को प्रशिक्षण: उन्होंने न केवल स्थानीय समुदाय की मदद की, बल्कि शांति मिशन पर तैनात अन्य सैनिकों को भी ‘जेंडर सेंसिटाइजेशन’ (लिंग संवेदीकरण) का महत्वपूर्ण प्रशिक्षण दिया।
एक और ऐतिहासिक उपलब्धि: मेजर अभिलाषा बराक के नाम पहले से ही एक बड़ी उपलब्धि दर्ज है—वह भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट (Combat Helicopter Pilot) भी हैं।
सम्मान पाने वाली तीसरी भारतीय सैन्य अधिकारी
संयुक्त राष्ट्र के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को हासिल करने वाली मेजर बराक भारत की तीसरी सैन्य अधिकारी बन गई हैं। उनसे पहले यह गौरव:
- मेजर सुमन गवानी (2019 – दक्षिण सूडान में यूएन मिशन)
- मेजर राधिका सेन (2024 – कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में यूएन मिशन) को मिल चुका है।
यह पुरस्कार साल 2016 में संयुक्त राष्ट्र के शांति संचालन विभाग द्वारा शुरू किया गया था। यह उन शांति सैनिकों को दिया जाता है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 (महिला, शांति और सुरक्षा) के सिद्धांतों को बढ़ावा देने और शांति गतिविधियों में जेंडर परिप्रेक्ष्य को एकीकृत करने में असाधारण नेतृत्व दिखाते हैं।
29 मई को न्यूयॉर्क में होंगी सम्मानित
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस खबर की पुष्टि करते हुए अपनी खुशी और गर्व व्यक्त किया है। मेजर अभिलाषा बराक को आगामी 29 मई को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क) में आयोजित होने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक दिवस’ के विशेष समारोह के दौरान इस वैश्विक सम्मान से नवाजा जाएगा।
भारत हमेशा से ही संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे बड़े सैन्य और पुलिस योगदानकर्ताओं में से एक रहा है, और मेजर बराक की यह ऐतिहासिक उपलब्धि दुनिया के कठिनतम क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों के सेवा भाव और समर्पण की एक और मिसाल बन गई है।


