उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया चौराहा) इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद शासन और प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 छात्र-छात्राओं की अकाल मौत के बाद, सरकार द्वारा गठित की गई विशेष जांच दल (SIT) की टीम मंगलवार, 23 जून 2026 को सुबह ही घटनास्थल पर पहुंच गई। एसआईटी के साथ फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के विशेषज्ञों और तकनीकी टीम ने भी पूरी इमारत का बारीकी से निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाने के बाद पूरी बिल्डिंग को सील कर दिया है।
फोरेंसिक टीम ने जुटाए अहम सबूत
हादसे की भयावहता को देखते हुए फोरेंसिक टीम के सदस्यों ने तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत के चप्पे-चप्पे की पड़ताल की।
- शॉर्ट सर्किट और केमिकल की जांच: टीम ने ग्राउंड फ्लोर पर स्थित उस पेट क्लीनिक और वेयरहाउस का निरीक्षण किया, जहां से सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे आग भड़कने की बात सामने आई थी। विशेषज्ञों ने वहां से बिजली के जले हुए तार, स्विच बोर्ड और अन्य उपकरणों के सैंपल लिए ताकि आग लगने की सही वजह (शॉर्ट सर्किट या कुछ और) का पता लगाया जा सके।
- दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य: एसआईटी ने इमारत में चल रहे 3D एनीमेशन सेंटर और कोचिंग संस्थान के कार्यालय से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज, सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर (DVR) और कंप्यूटर हार्ड डिस्क को भी अपने कब्जे में ले लिया है।
सुरक्षा मानकों की खुली पोल
जांच के पहले ही दिन यह साफ हो गया कि इस बहुमंजिला इमारत में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। एसआईटी की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि:
- एक ही निकास (Single Exit): पूरी बिल्डिंग में आने-जाने और आपातकालीन निकास (Emergency Exit) के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता या सीढ़ी थी। जब नीचे आग लगी, तो धुआं और लपटें इसी रास्ते से ऊपर पहुंचीं, जिससे बच्चों के भागने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
- फायर एनओसी का अभाव: शुरुआती जांच के मुताबिक, इस कमर्शियल गतिविधि वाली बिल्डिंग के पास वैध फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं था। बिल्डिंग में आग बुझाने वाले उपकरण (Fire Extinguishers) या तो एक्सपायर हो चुके थे या फिर आपातकाल में काम ही नहीं आए।
7 दिनों में सौंपनी है रिपोर्ट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद गृह विभाग द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) को 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। जांच टीम इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि जब यह इमारत आवासीय (Residential) रूप में पास थी, तो इतने वर्षों से यहां धड़ल्ले से कमर्शियल एक्टिविटी कैसे चल रही थी?
एसआईटी लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), नगर निगम और अग्निशमन विभाग के उन अधिकारियों की सूची भी तैयार कर रही है, जिनकी नाक के नीचे यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी रसूखदार या सरकारी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।


