हाल के समय में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों ने भारतीय रसोई के पारंपरिक स्वरूप को बदल दिया है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में कुल मिलाकर जितने इंडक्शन चूल्हे नहीं बिके, उससे कहीं अधिक बिक्री अकेले इस साल मार्च के महीने में दर्ज की गई है। यह बदलाव न केवल गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर, बल्कि पूरे देश में एक नए ‘किचन ट्रेंड’ की ओर इशारा कर रहा है।
बिक्री में उछाल के प्रमुख कारण
- LPG की बढ़ती लागत: गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और सब्सिडी के बदलते गणित ने आम आदमी को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर मुड़ने पर मजबूर कर दिया है।
- बिजली की बेहतर उपलब्धता: शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बिजली की स्थिति में सुधार होने से लोग अब गैस के बजाय इलेक्ट्रिक कुकिंग को अधिक विश्वसनीय और किफायती मान रहे हैं।
- आधुनिक तकनीक और सुरक्षा: इंडक्शन चूल्हे उपयोग में आसान हैं, इनमें आग लगने का खतरा कम होता है और ये पारंपरिक चूल्हों की तुलना में खाना जल्दी पकाते हैं। इसके ‘ऑटो-कट’ और ‘टाइमर’ जैसे फीचर्स कामकाजी लोगों के लिए काफी सुविधाजनक हैं।
- किफायती विकल्प: तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो एक मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बिजली पर खाना पकाना, गैस सिलेंडर के मुकाबले 15% से 20% तक सस्ता पड़ रहा है।
बाजार पर प्रभाव
इलेक्ट्रॉनिक शोरूम मालिकों का कहना है कि मार्च में मांग इतनी अधिक थी कि कई ब्रांड्स के स्टॉक खत्म हो गए। मध्यम वर्ग के साथ-साथ छात्र और अकेले रहने वाले कामकाजी पेशेवर भी इंडक्शन को प्राथमिकता दे रहे हैं। कंपनियों ने भी इस बढ़ती मांग को देखते हुए कम बिजली खपत वाले नए मॉडल बाजार में उतारे हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी बदलाव नहीं है। जिस तरह से लोग स्मार्ट और क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ रहे हैं, आने वाले समय में ‘हाइब्रिड किचन’ (गैस और बिजली दोनों का उपयोग) का चलन और बढ़ेगा। इंडक्शन चूल्हों की यह रिकॉर्ड तोड़ बिक्री इस बात का प्रमाण है कि उपभोक्ता अब सुविधा के साथ-साथ बजट को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं।
मुख्य बातें:
- मार्च में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री ने पिछले एक दशक का रिकॉर्ड तोड़ा।
- गैस की किल्लत और महंगाई ने उपभोक्ताओं को बिजली के विकल्पों की ओर धकेला।
- किफायती और सुरक्षित होना इंडक्शन की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण बना।


