कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के जरिए अर्धसैनिक बलों (CAPF) में नेतृत्व और पदोन्नति के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस व्यवस्था को ‘संस्थागत अन्याय’ करार दिया है।
अजय मलिक का उदाहरण और IPS लॉबी पर सवाल
राहुल गांधी ने असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का जिक्र करते हुए इस मुद्दे को उठाया। राहुल ने बताया कि अजय मलिक ने नक्सली मुठभेड़ में अपना एक पैर गंवा दिया, लेकिन 15 साल की सेवा के बाद भी उन्हें पदोन्नति (Promotion) नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि CAPF के शीर्ष पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं, जिसके कारण बल के अपने अधिकारियों को अपने ही बल का नेतृत्व करने का अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और जवानों का मनोबल
राहुल गांधी ने सरकार द्वारा लाए गए नए बिल की आलोचना करते हुए इसे जवानों के मनोबल को तोड़ने वाला बताया:
- भेदभावपूर्ण कानून: राहुल के अनुसार, वर्तमान सरकार कानून के जरिए इस ‘अन्याय’ को स्थायी बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि जब सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा पर तैनात जवानों का मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिल जाती है।
- सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ: उन्होंने याद दिलाया कि स्वयं उच्चतम न्यायालय ने भी इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, फिर भी सरकार भेदभाव खत्म करने को तैयार नहीं है।
कांग्रेस का चुनावी वादा: भेदभाव खत्म करने का संकल्प
राहुल गांधी ने स्पष्ट नीतिगत बदलाव का वादा करते हुए कहा, “जैसे ही कांग्रेस की सरकार सत्ता में आएगी, इस भेदभावपूर्ण कानून को निरस्त कर दिया जाएगा। जो देश के लिए लड़ते हैं, उन्हें नेतृत्व का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।”
CAPF की भूमिका और सम्मान
राहुल ने जोर दिया कि CAPF के जवान आतंकवाद, नक्सलवाद और चुनाव जैसी कठिन परिस्थितियों में देश की ढाल बनते हैं। उन्होंने कहा कि इन जवानों का सम्मान केवल बातों में नहीं, बल्कि नीतियों में दिखना चाहिए। इस बयान के बाद रक्षा और सुरक्षा गलियारों में एक बार फिर ‘कैडर रिव्यू’ और अर्धसैनिक बलों में प्रतिनियुक्ति (Deputation) को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे आने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में दिख रहा है।


