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    कर्नाटक में फिर नाटक, सिद्धारमैया, डीके और जी परमेश्वर पहुंचे दिल्ली, नजरें आलाकमान पर टिकीं

    कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर दिल्ली पहुंच चुके हैं। इन शीर्ष नेताओं के अचानक देश की राजधानी पहुंचने के बाद से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन और नई राजनीतिक रणनीति को लेकर कयासों का बाजार बेहद गर्म है। अब सभी की नजरें कांग्रेस आलाकमान के साथ होने वाली बैठकों और उनके अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।

    2-3 दिनों में स्थिति साफ होने के संकेत

    कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद अगले 2 से 3 दिनों के भीतर राज्य के राजनीतिक भविष्य को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है। कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान की खबरें आ रही थीं, जिस पर अब आलाकमान पूर्ण विराम लगाना चाहता है।

    किन मुद्दों पर होगी अहम चर्चा?

    माना जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक का एजेंडा काफी विस्तृत है:

    • नेतृत्व परिवर्तन: राज्य में मुख्यमंत्री की कुर्सी या सत्ता के रोटेशनल फॉर्मूले (बारी-बारी से सीएम बनना) को लेकर कोई बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।
    • कैबिनेट फेरबदल: सरकार के कामकाज को और बेहतर बनाने के लिए मंत्रिमंडल में मंत्रियों की जिम्मेदारियों को बदला जा सकता है या नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है।
    • आगामी चुनाव: कर्नाटक में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव और विधान परिषद (MLC) चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों और रणनीति पर अंतिम मुहर लगेगी।

    नेताओं का क्या कहना है?

    दिल्ली रवानगी से पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें आलाकमान द्वारा दिल्ली बुलाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें बैठक के तय एजेंडे की सटीक जानकारी नहीं दी गई है, हालांकि उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को सामान्य बताते हुए कहा कि ऐसी चर्चाएं राजनीति में हमेशा चलती रहती हैं।

    आगे की राह: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक में जो भी फैसले लिए जाएंगे, उनका कर्नाटक की सरकार और संगठन की स्थिरता पर बहुत गहरा और दूरगामी असर देखने को मिलेगा। देखना होगा कि कांग्रेस आलाकमान दोनों गुटों को संतुष्ट करने के लिए क्या बीच का रास्ता निकालता है।

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