भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के बाजार में अब मुकाबला और तेज होने वाला है। रिलायंस जियो करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स का अपना नेटवर्क तैयार करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। कंपनी का लक्ष्य देश के दूरदराज और ऐसे इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है, जहां पारंपरिक फाइबर या मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है। हालांकि, मौजूदा रिपोर्ट के मुताबिक जियो की अपनी सैटेलाइट सर्विस इसी साल शुरू नहीं होगी। कंपनी सितंबर 2027 में टेस्ट फ्लाइट की तैयारी कर रही है और बड़े पैमाने पर सेवा 2028 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है।
1,600 सैटेलाइट्स का नेटवर्क कैसे काम करेगा?
रिपोर्ट के मुताबिक जियो का प्रस्तावित नेटवर्क करीब 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर LEO सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करेगा। कंपनी भारत में करीब 20 से 22 ग्राउंड स्टेशन बनाने की योजना पर भी काम कर रही है। यह नेटवर्क केवल घरों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी की दिशा में भी काम करेगा। यानी भविष्य में मोबाइल डिवाइस को सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जोड़ने की क्षमता विकसित की जा सकती है।
जियो के प्रस्ताव को भारत के अंतरिक्ष नियामक IN-SPACe से तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑर्बिट स्लॉट और फ्रीक्वेंसी से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। योजना के तहत 2030 तक करीब 400 से 450 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने और 2035 तक पूरा नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य बताया गया है।
Starlink से कितना तेज होगा इंटरनेट?
जियो के नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्रस्तावित क्षमता है। रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक सैटेलाइट की थ्रूपुट क्षमता करीब 100 से 150 Gbps हो सकती है और पूरे नेटवर्क की कुल क्षमता 4 से 4.8 Tbps तक पहुंच सकती है। इसी वजह से जियो के नेटवर्क की क्षमता मौजूदा और प्रस्तावित कुछ वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क से काफी अधिक बताई जा रही है।
हालांकि, इसे सीधे तौर पर यह कहना कि जियो का इंटरनेट Starlink से आठ गुना तेज होगा, सावधानी से देखा जाना चाहिए। नेटवर्क की कुल क्षमता और किसी ग्राहक को मिलने वाली वास्तविक इंटरनेट स्पीड अलग-अलग चीजें हैं। वास्तविक स्पीड यूजर की संख्या, ग्राउंड स्टेशन, स्पेक्ट्रम, नेटवर्क लोड और टर्मिनल तकनीक पर निर्भर करेगी।
Starlink से मुकाबला क्यों अहम?
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर पहले ही प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। Starlink, Eutelsat OneWeb और अन्य कंपनियां भारतीय बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रही हैं। सरकार भी सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की फीस और आवंटन से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।
ऐसे में जियो का स्वदेशी LEO नेटवर्क भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। अगर योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय ग्राहकों के पास फाइबर और 5G के साथ-साथ सैटेलाइट इंटरनेट का भी बड़ा विकल्प होगा।


