जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छात्रू (Chhatroo) इलाके में शनिवार (1 अगस्त 2026) तड़के करीब 2:30 बजे बादल फटने (Cloudburst) के बाद अचानक आई भीषण बाढ़ से भारी तबाही मच गई है। अचानक आए सैलाब और मलबे के कारण स्थानीय बाजार, कई दुकानें, मकान और रास्ते जलमग्न हो गए हैं।
पहाड़ों से आए पत्थरों और मलबे की वजह से किश्तवाड़-छात्रू-सिंथन राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-244) को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
तबाही और नुकसान का मंजर
- वाहन बहे और बाजार में घुसा मलबा: नाले में अचानक आए उफान और जलस्तर बढ़ने के कारण किनारे खड़े कम से कम दो वाहन बह गए। मुख्य बाजार में भारी मात्रा में मलबा, बड़े बोल्डर और कीचड़ जमा हो गया, जिससे कई व्यापारिक प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हो गए।
- राहत की खबर: गनीमत यह रही कि इस घटना में अब तक किसी भी जान-माल के नुकसान या किसी नागरिक के हताहत होने की खबर नहीं है।
- केंद्रीय मंत्री का आश्वासन: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किश्तवाड़ के उपायुक्त (DC) पंकज कुमार शर्मा से बात कर स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित दुकानदारों को उचित सरकारी मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।
चेनाब घाटी में अलर्ट: किश्तवाड़, डोडा और रामबन में स्कूल बंद
मूसलाधार बारिश, फिसलन और पहाड़ों से पत्थर गिरने (Shooting Stones) के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है:
- स्कूल बंद रखने के आदेश: किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को सुरक्षा के मद्देनजर बंद करने का आदेश दिया है।
- ऑनलाइन कक्षाओं के निर्देश: छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए सभी शैक्षणिक संस्थानों को डिजिटल माध्यमों से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) और मौसम का पूर्वानुमान
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पिछले साल की चिशोती घटना के बाद क्षेत्र में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (EWS) स्थापित किए गए थे, जिससे मौसम निगरानी में सुधार हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 7 अगस्त तक रुक-रुक कर भारी बारिश और कम समय में तीव्र जलभराव की संभावना बनी रहेगी। प्रशासन ने लोगों को नदियों और नालों के करीब न जाने की सख्त सलाह दी है।


