अमेरिका और ईरान के बीच होने जा रहे ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर जहां दुनिया भर में राहत की सांस ली जा रही है, वहीं मध्य पूर्व (Middle East) में नया कूटनीतिक और सैन्य घमासान शुरू हो गया है। इस्राइल ने इस प्रस्तावित समझौते को सिरे से खारिज करते हुए एक विद्रोही और कड़ा रुख अपना लिया है।
इस्राइली रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश इस समझौते का हिस्सा नहीं है और वे अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं से कोई समझौता नहीं करेंगे। आइए समझते हैं कि इस्राइल ने इस डील पर क्या आपत्ति जताई है और लेबनान को लेकर क्या ‘लाल रेखा’ (Red Line) खींची है।
इस्राइल ने क्यों खारिज की अमेरिका-ईरान डील?
शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने जा रहे इस समझौते (MoU) के तहत अमेरिका और ईरान युद्ध रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान पर से आर्थिक प्रतिबंध हटाने पर सहमत हुए हैं। लेकिन इस्राइल इस डील से पूरी तरह असहमत है।
- स्वतंत्र कार्रवाई की चेतावनी: इस्राइली रक्षा मंत्रालय ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाने के लिए स्वतंत्र हैं और अमेरिकी समझौते के बावजूद अपनी सुरक्षा के लिए स्वतंत्र रूप से कार्रवाई जारी रखेंगे।
- कब्जे वाले इलाकों से पीछे हटने से इनकार: इस्राइल ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि वह लेबनान, सीरिया, गाजा और वेस्ट बैंक के उत्तरी शरणार्थी शिविरों में अपनी मौजूदा सैन्य उपस्थिति या कब्जे वाले क्षेत्रों से अपनी सेना को बिल्कुल भी पीछे नहीं हटाएगा।
- अधूरी परमाणु शर्तें: इस्राइल का मानना है कि यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने में नाकाम है और यह ईरान को दोबारा मजबूत होने के लिए केवल एक ‘टैक्टिकल पॉज’ (समय) देगा।
लेबनान को लेकर खींची ‘लाल रेखा’
इस पूरे समझौते में सबसे बड़ा विवाद लेबनान और वहां सक्रिय ईरानी समर्थित चरमपंथी संगठन हिज्बुल्लाह को लेकर खड़ा हो गया है।
तनाव का मुख्य केंद्र: कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता वाले इस मसौदे में ईरान का दावा है कि इस समझौते के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध तुरंत रोका जाएगा। लेकिन इस्राइल ने लेबनान को अपनी सबसे बड़ी ‘रेड लाइन’ घोषित कर दिया है।
- हमले जारी रखने का संकल्प: इस्राइल ने साफ कहा है कि वह लेबनान मोर्चे पर हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को बंद नहीं करेगा।
- बैरूत पर एयरस्ट्राइक: इस रुख को जमीन पर दिखाते हुए इस्राइली सेना (IDF) ने लेबनान की राजधानी बैरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटरों को निशाना बनाकर भीषण हवाई हमले किए हैं। इन हमलों ने शांति समझौते की मेज पर बैठे दोनों देशों (US और ईरान) को भी हैरान कर दिया है।
- ट्रंप की नसीहत: इन हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल को संयम बरतने और लेबनान में हमले तुरंत रोकने की हिदायत दी है, क्योंकि इससे यह महा-डील खटाई में पड़ सकती है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
इस्राइल के इस कड़े स्टैंड ने अमेरिका के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हालांकि ट्रंप से बातचीत के बाद पूर्ण सहमति का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर इस्राइली सेना पीछे हटने को तैयार नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुक्रवार को अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर हो भी जाते हैं, तो भी जब तक इस्राइल और हिज्बुल्लाह के बीच जमीनी जंग नहीं रुकती, तब तक मध्य पूर्व में स्थायी शांति का दावा करना जल्दबाजी होगी।


