भारतीय राजनीति में इस समय विपक्षी खेमे, विशेषकर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर मची भगदड़ ने सबको चौंका दिया है। पहले पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों का पाला बदलकर नई पार्टी ‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) बनाना और अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसदों का बागी होकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखना— यह सब कोई संयोग नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सामने दिख रही यह टूट भले ही विपक्षी नेताओं का आपसी असंतोष लगे, लेकिन इसके पीछे केंद्र की मोदी सरकार और एनडीए (NDA) की एक बेहद लंबी और ‘सीक्रेट’ रणनीतिक बिसात छिपी हुई है।
मोदी सरकार का क्या है ‘सीक्रेट टारगेट’?
इस राजनीतिक लामबंदी के पीछे मोदी सरकार का एक बड़ा और दूरगामी लक्ष्य (Long-term Target) छिपा है, जो सीधे तौर पर देश की आने वाली चुनावी और कूटनीतिक दशा-दिशा तय करेगा:
- महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) को अमलीजामा पहनाना: साल की शुरुआत में विपक्ष ने संसद के भीतर महिलाओं के लिए कोटा (महिला आरक्षण कानून) और लोकसभा सीटों के नए परिसीमन को लागू करने की सरकार की कोशिशों को एकजुट होकर रोकने का प्रयास किया था। सरकार का मुख्य टारगेट अब संसद में इतनी मजबूत संख्या बल (सहमति) जुटाना है, जिससे परिसीमन और आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को बिना किसी बड़े कूटनीतिक गतिरोध के पारित कराया जा सके।
बगावत का पूरा गणित: टीएमसी और शिवसेना (UBT) में सेंध
इस गुप्त रणनीति के तहत एक-एक राज्य करके एनडीए अपने लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है:
- बंगाल में टीएमसी का ‘खेल’: पश्चिम बंगाल में बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 20 बागी सांसदों का गुट ‘NCPI’ के बैनर तले आ चुका है। इस गुट ने साफ कर दिया है कि वे संसद के भीतर एनडीए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का खुलकर समर्थन करेंगे।
- महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) पर ‘ऑपरेशन टाइगर’: 17 जून को शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने दिल्ली में अलग गुट बनाने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दिया। इसे लेकर विपक्ष में भारी खलबली है।
संजय राउत का ‘₹50 करोड़’ का सनसनीखेज दावा
विपक्ष के सांसदों की इस लामबंदी पर शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने बहुत बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है। राउत ने दावा किया कि विपक्षी सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी-भरकम रकम की पेशकश की जा रही है: “मुझे एक फोन आया था, जिससे पता चला कि हर सांसद को पार्टी छोड़ने के लिए ₹50-50 करोड़ की पेशकश की जा रही है। इसमें से ₹15 करोड़ तो एडवांस के तौर पर पहले ही दिए जा चुके हैं। स्थिति यह थी कि कुछ बागी सांसद तब तक चार्टर्ड प्लेन में बैठने को तैयार नहीं थे, जब तक कि उनके पास एडवांस की रकम नहीं पहुंच गई।”
सांसदों की इस बड़े पैमाने पर लामबंदी और दलबदल के बाद अब संसद के भीतर संख्या बल का पूरा समीकरण बदलने वाला है, जो मोदी सरकार को उसके बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने का सीक्रेट रास्ता साफ कर रहा है।


