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    ईरान का 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव, ट्रंप भी घरेलु चुनौतियों से घिरे, 1 मई तक है डेटलाइन

    पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। ईरान ने एक नया 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिस पर अमेरिका और इजरायल विचार कर रहे हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने 1 मई 2026 के बाद युद्ध जारी रखने को लेकर गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। ट्रंप की लोकप्रियता रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है क्योंकि युद्ध के कारण अमेरिका में महंगाई और जीवन यापन का संकट बढ़ गया है।

    ईरान का नया शांति प्रस्ताव

    तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब अन्य देशों पर अपनी नीतियां नहीं थोप सकता। ईरान के नए प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और शत्रुता को तत्काल समाप्त करने की बात कही गई है। हालांकि, ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका को अपना समुद्री घेराबंदी (Naval Blockade) खत्म करनी होगी। व्हाइट हाउस वर्तमान में इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, लेकिन ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि यदि इसमें परमाणु कार्यक्रम पर सख्त पाबंदी नहीं हुई, तो यह स्वीकार्य नहीं होगा।

    ट्रंप प्रशासन के सामने चुनौतियां

    • 1 मई की समयसीमा: पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ अस्थायी युद्धविराम 1 मई को समाप्त हो रहा है। अगर इसके बाद युद्ध फिर से शुरू होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप होने का खतरा है।
    • घरेलू दबाव: अमेरिका में युद्ध के बढ़ते खर्च और रिकॉर्ड महंगाई ने ट्रंप की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप युद्धविराम को कुछ ही दिनों से ज्यादा बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।
    • वैश्विक प्रभाव: यूएई के ‘ओपेक’ छोड़ने के फैसले ने भी ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है, जिससे अमेरिका पर दबाव बढ़ गया है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

    दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी अभी भी जारी है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपनी नेतृत्व स्थिति को संभालने के लिए जल्द से जल्द इसे खुलवाना चाहता है, जबकि ईरान का कहना है कि वे अमेरिकी ‘अवैध और तर्कहीन’ मांगों के आगे नहीं झुकेंगे।

    अगले 48 घंटे पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं। यदि 1 मई तक किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बनती है, तो इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के बुनियादी ढांचे पर फिर से बड़े हमलों की आशंका है। वहीं, पनामा नहर जैसे वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने लगा है, जो वैश्विक मंदी का संकेत दे रहा है।

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