भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री (Secretary of State) मार्को रुबियो ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस (Joint PC) को संबोधित किया। दोनों नेताओं के बीच ईरान संकट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, अमेरिकी वीजा और नस्लवाद जैसे गंभीर वैश्विक व द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
- ईरान शांति समझौते पर बड़ी घोषणा की उम्मीद: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में “महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जल्द ही (कुछ ही घंटों में) की जा सकती है।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख: रुबियो ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को टैक्स-फ्री खोलना: अमेरिकी विदेश मंत्री ने बताया कि खाड़ी देशों के साथ मिलकर एक रूपरेखा (Framework) तैयार की जा रही है, जो सफल होने पर बिना किसी ‘टोल’ या टैक्स के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और खुला मार्ग बनाएगी।
- अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में ईरानी धमकी अवैध: मार्को रुबियो ने कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और वाणिज्यिक जहाजों को रोकने या नष्ट करने की ईरान की कोई भी धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह अवैध है।
- नस्लभेदी टिप्पणियों पर रुबियो का करारा जवाब: अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के खिलाफ ऑनलाइन और अन्य माध्यमों पर हो रही नस्लभेदी टिप्पणियों के सवाल पर रुबियो ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “दुनिया के हर देश की तरह अमेरिका में भी कुछ बेवकूफ लोग हैं जो ऐसी टिप्पणियां करते हैं। अमेरिका एक स्वागत करने वाला देश है, जिसे वैश्विक प्रतिभाओं से हमेशा फायदा हुआ है।”
- भारत का अमेरिकी ऊर्जा आयात पर जोर: विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हाल के वर्षों में अमेरिका से भारत का ऊर्जा आयात काफी बढ़ा है। जोखिम कम करने (Risk Mitigation) के इस युग में अमेरिका भारत के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और विश्वसनीय ऊर्जा भागीदार बनकर उभरा है।
- ऊर्जा बाजार में किसी पाबंदी का विरोध: जयशंकर ने होर्मुज संकट पर भारत का रुख साफ करते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्रोतों में विविधता ला रहा है। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक विकास के लिए ऊर्जा की कीमतों को कम रखना जरूरी है और ऊर्जा बाजारों को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए।
- वैध यात्रियों के लिए अमेरिकी वीजा का मुद्दा: जयशंकर ने अमेरिकी नागरिकों और वैध यात्रियों को वीजा जारी करने में आने वाली प्रशासनिक चुनौतियों का मुद्दा रुबियो के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासन से निपटने के प्रयासों का असर वैध व्यापार, अनुसंधान और तकनीकी आवाजाही पर नहीं पड़ना चाहिए।
- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस और 26/11 का जिक्र: आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों ने कड़ा रुख दोहराया। जयशंकर ने 26/11 मुंबई हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता के अमेरिका द्वारा भारत को किए गए प्रत्यर्पण (Extradition) की सराहना की और आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों के आपसी सहयोग को और मजबूत करने की बात कही।
- रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पर फोकस: जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच 10 वर्षीय ‘प्रमुख रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क समझौते’ को नवीनीकृत किया गया है। भारत ने जोर दिया कि भविष्य के रक्षा सहयोग और उपकरणों के सह-उत्पादन में भारत के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


