पश्चिम एशिया (West Asia Crisis 2026) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर की गई बमबारी के बाद, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर कड़ा पलटवार किया है। तेहरान ने दोटूक चेतावनी दी है कि वे युद्धविराम (Ceasefire Agreement) के किसी भी उल्लंघन का करारा जवाब देंगे।
संघर्ष की मुख्य वजह और ताजा घटनाक्रम
यह पूरा विवाद अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया अंतरिम युद्धविराम समझौते के टूटने के बाद शुरू हुआ है।
- तनाव की शुरुआत: ईरान ने आरोप लगाया था कि इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान पर लगातार किए जा रहे हमले अमेरिका-ईरान समझौते का खुला उल्लंघन हैं। इसके विरोध में ईरान ने व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया था।
- समुद्री जहाजों पर हमला: इसके बाद शनिवार को ओमान के तट के पास एक कमर्शियल तेल टैंकर ‘एमटी कीकू’ (M/T Kiku) पर ईरानी ड्रोन से हमला किया गया।
- अमेरिकी एयरस्ट्राइक: इस हमले के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने रविवार सुबह ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज और तटीय रडार प्रणालियों को निशाना बनाया।
- ईरान का पलटवार: अमेरिकी हमले से भड़के ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने कुवैत में ‘अली अल-सलेम’ एयरबेस और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet Base) पर जोरदार हमला कर कई ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया (Truth Social) पर पोस्ट कर ईरान को सीधी चेतावनी दी है:
“यदि ईरान लगातार युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करता रहा, तो एक ऐसा समय आएगा जब अमेरिका के लिए संयम बरतना मुमकिन नहीं होगा। हमें सैन्य रूप से इस काम को पूरी तरह अंजाम देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ, तो ईरान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।”
मौजूदा स्थिति और वैश्विक चिंता
पश्चिम एशिया का यह संकट एक ऐसे समय में गहराया है जब दोनों देश स्विट्जरलैंड में अंतिम शांति समझौते (Final Peace Accord) के लिए बातचीत की तैयारी कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने और खाड़ी देशों (कुवैत और बहरीन) में अमेरिकी ठिकानों पर सीधे हमलों से यह युद्ध पूरी तरह से अनियंत्रित हो सकता है। फिलहाल, लेबनान और इजरायल के बीच भी जमीनी हालात नाजुक बने हुए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका तेज हो गई है।


