पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भारतीय नौसेना में आईएनएस अग्रय, आईएनएस दुनागिरी और आईएनएस संशोधक को शामिल किए जाने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए भारत की ताकत का प्रतीक बताया। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ‘हमारी सैन्य शक्ति दुनिया के लिए सिर्फ एक बाजार नहीं बन सकती’। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि रक्षा के क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता (Self-reliance) हासिल करना ही अब ‘नए भारत’ की असली और मजबूत पहचान है।
रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता खत्म करने का संकल्प
प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि एक समय था जब भारत को दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदार और रक्षा आयातकों (Defense Importers) में से एक माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश की नीतियों और एप्रोच में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव आया है।
“भारत अपनी सुरक्षा और सैन्य शक्ति की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकता। हम दुनिया के सामने केवल एक बड़ा बाजार बनकर खड़े नहीं रह सकते, जहां विदेशी कंपनियां आकर अपने उत्पाद बेचें। नए भारत का संकल्प है कि हम अपनी सेनाओं के लिए साजो-सामान और अत्याधुनिक हथियार खुद अपनी धरती पर, अपने देश के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मदद से तैयार करेंगे।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक पहलू से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता और सामरिक सुरक्षा (Strategic Security) के लिए भी बेहद आवश्यक है।
‘मेक इन इंडिया’ से ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ का सफर
प्रधानमंत्री ने रक्षा विनिर्माण (Defense Manufacturing) के क्षेत्र में भारत द्वारा हासिल की गई हालिया उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज भारत न केवल अपनी सेनाओं के लिए मिसाइलें, लड़ाकू विमान, टैंक और युद्धपोत बना रहा है, बल्कि अब हम दुनिया के कई मित्र देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात (Export) भी कर रहे हैं।
वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता कद
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और वैश्विक मोर्चे पर बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों (Geopolitical Dynamics) का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के दौर में वही देश सुरक्षित है जिसकी सुरक्षा व्यवस्था आत्मनिर्भर है। भारत अब किसी संकट के समय दूसरे देशों की तरफ नहीं देखता, बल्कि अपनी चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है।
पीएम मोदी के इस बयान को रक्षा क्षेत्र में भारत की संप्रभुता को और मजबूत करने तथा वैश्विक कंपनियों को भारत में ही आकर तकनीक साझा करने व निर्माण करने (‘मेक इन इंडिया’) के एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


