कंगाली और आंतरिक राजनीतिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) और चिनाब नदी पर भारत द्वारा बनाए जा रहे बांधों को लेकर सीधी युद्ध की धमकी दी है। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान आसिफ ने भड़काऊ बयान देते हुए कहा कि अगर भारत ने पानी को लेकर अपना अड़ियल रुख नहीं बदला, तो पाकिस्तान के पास युद्ध (War) के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा। इसके साथ ही उन्होंने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) की स्थिति पर भी बयान दिया है।
चिनाब नदी पर बांधों को लेकर बौखलाया पाकिस्तान
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों और सिंधु जल समझौते का उल्लंघन कर चिनाब नदी पर बड़े बांध बना रहा है, जिससे पाकिस्तान के हिस्से का पानी रुक रहा है। ख्वाजा आसिफ ने कहा, “भारत पानी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। वे चिनाब पर बांध बनाकर हमारे कृषि क्षेत्र को सुखा देना चाहते हैं। अगर हमारी कूटनीतिक कोशिशें नाकाम रहीं और भारत ने अपना रुख नहीं बदला, तो हम अपने हक के पानी के लिए भारत के साथ युद्ध करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है।”
PoK पर बोले— ‘वहां कोई विद्रोह नहीं, केवल महंगाई का विरोध’
इंटरव्यू के दौरान जब ख्वाजा आसिफ से पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में हाल के महीनों में भड़के बड़े जन-आक्रोश, नागरिक आंदोलनों और भारत के पक्ष में उठ रही आवाजों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह सच्चाई से पल्ला झाड़ लिया।
आसिफ ने दावा किया कि PoK में कोई राजनीतिक विद्रोह या पाकिस्तान से अलग होने की मांग नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि वहां के लोग केवल बढ़ती महंगाई, बिजली के भारी बिलों और आटे की किल्लत के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जिसे सरकार ने सब्सिडी देकर काफी हद तक शांत कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय मीडिया PoK के स्थानीय आर्थिक मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर और तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है।
भारत का रुख और पाकिस्तान की हताशा
भारत सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह 1960 के सिंधु जल समझौते की समीक्षा और उसमें संशोधन चाहती है, क्योंकि पिछले कुछ दशकों में तकनीकी और जलवायु परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
- भारत का कड़ा रुख: भारत का मानना है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देकर और बार-बार इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालतों में खींचकर समझौते की भावना को ठेस पहुंचा रहा है।
- कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में जारी भीषण आर्थिक मंदी, कंगाली और जनता के गुस्से से ध्यान भटकाने के लिए वहां के नेता अक्सर ‘कश्मीर’ और ‘भारत से युद्ध’ जैसे घिसे-पिटे बयानों (गीदड़भभकियों) का सहारा लेते हैं, और ख्वाजा आसिफ का यह बयान भी इसी हताशा का नतीजा है।


