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    भारत ने अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ा, न्यूक्लियर रिएक्टर से ऐसे बनाई हाइड्रोजन

    भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने तमिलनाडु के कल्पक्कम में दुनिया की पहली परमाणु थर्मल-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा (Nuclear heat-based Hydrogen Production Facility) शुरू की है। यह तकनीक इतनी उन्नत है कि अमेरिका और चीन जैसे देश भी अभी इस पर शोध ही कर रहे हैं।

    क्या है यह तकनीक और भारत ने कैसे रचा इतिहास?

    आमतौर पर ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ बनाने के लिए इलेक्ट्रोलाइजर्स (Electrolyzers) का उपयोग करके पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है, जिसमें बहुत अधिक मात्रा में बिजली (Electricity) खर्च होती है।

    लेकिन भारत ने बिजली पर निर्भर रहने के बजाय सीधे न्यूक्लियर रिएक्टर से निकलने वाली गर्मी (Nuclear Process Heat) का उपयोग करके पानी को रासायनिक रूप से विभाजित करने की तकनीक विकसित कर ली है। कल्पक्कम में स्थित फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) से निकलने वाली थर्मल ऊर्जा (हीट) का इस्तेमाल कर सीधे हाइड्रोजन का निर्माण किया जा रहा है।

    कॉपर-क्लोरीन (Cu-Cl) चक्र: भारत का स्वदेशी फॉर्मूला

    भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च (IGCAR) ने मिलकर इसके लिए कॉपर-क्लोरीन (Cu-Cl) थर्मोकेमिकल चक्र विकसित किया है।

    • कम तापमान पर काम: दुनिया भर में पानी को गर्मी से तोड़ने के लिए सल्फर-आयोडीन चक्र पर शोध हो रहा है, जिसके लिए 850°C से अधिक तापमान की जरूरत होती है।
    • भारत की बढ़त: भारत का Cu-Cl चक्र सिर्फ 530°C के आसपास ही कुशलता से काम करता है। यह तापमान भारत के फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों के अनुकूल है, जिससे इसे सीधे न्यूक्लियर प्लांट से जोड़ना आसान हो गया है।

    पारंपरिक तरीकों बनाम भारत की नई तकनीक

    विशेषतापारंपरिक इलेक्ट्रोलिसिसभारत की न्यूक्लियर-हीट तकनीक
    मुख्य स्रोतभारी मात्रा में ग्रिड बिजलीन्यूक्लियर रिएक्टर की बची हुई गर्मी (Heat)
    लागत और इनपुटबिजली महंगी होने के कारण उत्पादन लागत अधिकबिजली की खपत न्यूनतम, लागत बेहद कम
    उपलब्धतासौर/पवन ऊर्जा पर निर्भर (मौसम आधारित)न्यूक्लियर रिएक्टर से 24 घंटे निरंतर (24/7) उत्पादन
    कार्बन उत्सर्जनयदि कोयले की बिजली हो तो प्रदूषण होता है100% शून्य कार्बन (Zero Carbon) उत्सर्जन

    भविष्य के मायने

    परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहन्ती ने बताया कि यह मील का पत्थर भारत को नेट-जीरो (Net-Zero) उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर ले जाएगा। आने वाले समय में ये एडवांस न्यूक्लियर प्लांट केवल बिजली ही नहीं पैदा करेंगे, बल्कि एक ही जगह से हाइड्रोजन, औद्योगिक स्टीम और साफ पानी (डिसैलिनेशन) भी प्रदान करने वाले इंटीग्रेटेड एनर्जी हब बन जाएंगे।

    यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और आत्मनिर्भर भारत (Viksit Bharat) के संकल्प को वैश्विक मंच पर सबसे आगे खड़ा करती है।

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