प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली (सेवा तीर्थ) में भारत के प्रमुख 20 स्पेस स्टार्टअप्स के संस्थापकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सल, ध्रुव स्पेस, गैलेक्सी, पियर्साइट, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस और दिगंतरा जैसी अग्रणी कंपनियों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री ने भारतीय स्पेस सेक्टर को वैश्विक निवेशकों, प्रतिभाओं और कंपनियों के लिए एक बड़ा केंद्र (मैग्नेट) करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के फैसले के बाद से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बदलाव आया है। आज देश में 440 से अधिक स्पेस-टेक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं और इस क्षेत्र में निजी निवेश बढ़कर लगभग $618.5 मिलियन (₹5,000 करोड़ से अधिक) तक पहुँच गया है।
रॉकेट, सैटेलाइट और AI का दैनिक जीवन में उपयोग
प्रधानमंत्री ने युवा उद्यमियों की सराहना करते हुए कहा कि अंतरिक्ष तकनीक को केवल रॉकेट, उपग्रह या विशेष सरकारी मिशनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने स्पेस स्टार्टअप्स से अपील की कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैटेलाइट डेटा का उपयोग आम जनमानस के जीवन को बेहतर बनाने में करें:
- कृषि व पशुपालन: फसल निगरानी, मिट्टी-पानी का आकलन, मौसम पूर्वानुमान और डेयरी प्रबंधन में उपग्रह तकनीकों का उपयोग बढ़ाना।
- जलवायु व पर्यावरण: हाइपरलोकल वेदर प्रेडिक्शन, पर्यावरण संरक्षण और स्पेस डेब्रिस (अंतरिक्ष कचरा) हटाने के लिए नई तकनीकों का विकास।
- अटल टिंकरिंग लैब्स: स्कूली बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा जगाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाना।
ग्लोबल स्पेस लीडरशिप का रोडमैप
इन-स्पेस (IN-SPACe) के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लक्ष्य आने वाले वर्षों में $8 बिलियन से बढ़ाकर $44 बिलियन तक पहुँचना है, जिसमें $11 बिलियन विदेशी ग्राहकों से हासिल करने का लक्ष्य है। निजी कंपनियां जैसे अग्निकुल (रीयूजेबल रॉकेट) और स्काईरूट पहले से ही वैश्विक ऑर्डर पर काम कर रही हैं।
पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि भारत का प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम न केवल देश के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मजबूत और व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी मॉडल बनकर उभरेगा।


