प्रसिद्ध अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक और प्रोफेसर जॉन मियरशाइमर (John Mearsheimer) के उस चौंकाने वाले दावे का विश्लेषण किया गया है, जिसमें उन्होंने ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के परमाणु युद्ध में बदलने की आशंका जताई है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के दिग्गज प्रोफेसर जॉन मियरशाइमर ने एक साक्षात्कार में चेतावनी दी है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक वार्ता विफल रहती है, तो इजरायल अपने अस्तित्व को बचाने के लिए परमाणु हथियारों का सहारा ले सकता है। मियरशाइमर का मानना है कि मध्य पूर्व की स्थिति अब उस मोड़ पर आ गई है जहाँ पारंपरिक युद्ध की सीमाएं समाप्त हो रही हैं।
प्रोफेसर मियरशाइमर के दावे के मुख्य बिंदु
- अस्तित्व का संकट: मियरशाइमर के अनुसार, यदि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने में सफल हो जाता है, तो इजरायल इसे अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानेगा। ऐसी स्थिति में इजरायल “अंतिम विकल्प” के रूप में परमाणु हमला कर सकता है।
- वार्ता की विफलता: लेख में स्पष्ट किया गया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते (JCPOA) को लेकर चल रही बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँचती, तो इजरायल अकेला कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगा।
- पारंपरिक सैन्य सीमाएं: इजरायल की वायु सेना कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करना पारंपरिक हथियारों से कठिन है। इसीलिए परमाणु हमले की चर्चा तेज हुई है।
इजरायल की रणनीति और ‘ऑप्शन सी’
इजरायल ने आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया कि उसके पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन पूरी दुनिया इसे एक “खुला रहस्य” मानती है। प्रोफेसर का तर्क है कि इजरायल का सैन्य सिद्धांत हमेशा ‘प्रिवेंटिव स्ट्राइक’ (निवारक हमले) पर आधारित रहा है।
“जब इजरायल को लगेगा कि दीवार से पीठ लग गई है और ईरान को रोकने का कोई और रास्ता नहीं बचा, तो वह परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेगा।” – मियरशाइमर
क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव
यदि यह दावा हकीकत में बदलता है, तो इसके परिणाम विनाशकारी होंगे:
- वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट: तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि।
- तीसरा विश्व युद्ध: रूस और चीन जैसे देशों का इस संघर्ष में कूदना तय माना जा रहा है।
- मानवीय त्रासदी: मध्य पूर्व के एक बड़े हिस्से में रेडियोधर्मी विकिरण और जनहानि।
हालांकि यह दावा अभी केवल एक भू-राजनीतिक विश्लेषण है, लेकिन इसने वैश्विक मंच पर हलचल पैदा कर दी है। दुनिया भर के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रभावी कूटनीति और संवाद ही इस संभावित परमाणु तबाही को रोक सकते हैं। फिलहाल, सबकी निगाहें वाशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली अगली चालों पर टिकी हैं।


