वैज्ञानिकों ने रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी सफलता हासिल की है। अब तक सूरज की रोशनी और हवा से बिजली बनाने की तकनीकें इस्तेमाल होती रही हैं, लेकिन अब हवा में मौजूद ‘उमस’ (ह्यूमिडिटी) से 24 घंटे लगातार बिजली पैदा की जा सकेगी।
लंदन की क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी, वारविक यूनिवर्सिटी, इम्पीरियल कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटास मर्केटरम के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक अनोखा मॉइस्चर-इलेक्ट्रिक जनरेटर (MEG) विकसित किया है। यह जनरेटर रसोई में मिलने वाली आम चीजों जैसे नमक और जिलेटिन से बनाया गया है।
तोड़े सोलर और विंड एनर्जी के रिकॉर्ड
समान्य तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए खराब मानी जाने वाली उमस को वैज्ञानिकों ने एक शक्तिशाली और कभी न खत्म होने वाले पावर सोर्स में बदल दिया है। इस छोटे से जनरेटर ने अपने प्रदर्शन से सोलर और विंड एनर्जी के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:
- लगातार 30 दिन तक बिजली: यह जनरेटर बिना रुके केवल हवा की नमी सोखकर लगातार 30 दिनों से अधिक समय तक लगभग 1 वोल्ट बिजली पैदा करने में कामयाब रहा।
- 90 वोल्ट तक का करंट: जब शोधकर्ताओं ने इस तरह के कई जनरेटर यूनिट्स को एक सीरीज में आपस में जोड़ा, तो इस सेटअप ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 90 वोल्ट तक का करंट पैदा किया। यह करंट 40 एलईडी (LED) लाइटों की लड़ी को आसानी से जलाने के लिए पर्याप्त है।
कैसे काम करता है यह अनोखा जनरेटर?
इस तकनीक को पूरी तरह इको-फ्रेंडली (पर्यावरण के अनुकूल) और बेहद सरल तरीके से तैयार किया गया है:
- बनावट: इसमें जिलेटिन, टेबल सॉल्ट (नमक) और एक्टिवेटेड कार्बन (सक्रिय कार्बन) जैसे खाद्य-ग्रेड (food-grade) पदार्थों का उपयोग किया गया है।
- प्रक्रिया: जब नमक और जिलेटिन के जलीय घोल को सुखाया जाता है, तो यह खुद-ब-खुद तीन परतों वाली एक विशेष संरचना (self-stratified structure) में बदल जाता है।
- बिजली का उत्पादन: यह संरचना जैसे ही वातावरण की नमी या इंसानी त्वचा के संपर्क में आती है, पानी के कणों को सोखने लगती है। नमी मिलते ही सामग्री के भीतर नमक के आयन (ions) तेजी से गति करने लगते हैं, और आयनों की इसी हलचल से लगातार बिजली पैदा होती है।
स्मार्ट हेल्थ सेंसर और टचलेस तकनीक
बिजली बनाने के अलावा यह डिवाइस कई और एडवांस काम भी कर सकता है:
- हेल्थ मॉनिटरिंग: यह मानव त्वचा के अनुकूल है और एक स्मार्ट हेल्थ सेंसर की तरह काम कर सकता है। इसकी मदद से मरीज के सांस लेने के पैटर्न को रियल-टाइम में ट्रैक किया जा सकता है।
- बोलने से पहचान: बात करते समय मुंह से निकलने वाली भाप की नमी में होने वाले छोटे बदलावों को पकड़कर यह शब्दों की पहचान करने में भी सक्षम है।
- टचलेस सेंसर: बिना छुए, सिर्फ उंगली को इसके करीब लाने मात्र से यह एक टचलेस प्रॉक्सिमिटी सेंसर की तरह काम करता है।
पर्यावरण के लिए वरदान: पारंपरिक बैटरियों के विपरीत, यह जनरेटर पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल (बायो-नष्ट होने योग्य) है। इस्तेमाल खत्म होने के बाद इसे मिट्टी में फेंकने पर यह कुछ ही हफ्तों में खुद गल जाता है या इसे पानी में घोलकर इसके घटकों को दोबारा रीसायकल किया जा सकता है। इससे जहरीला इलेक्ट्रॉनिक कचरा (e-waste) पैदा नहीं होता।


