भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अप्रैल 2026 के अंत तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के लिए एक गंभीर ‘लू’ (Heatwave) का अलर्ट जारी किया है। भीषण गर्मी का यह दौर विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ जैसे क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले रहा है, जहाँ अधिकतम तापमान 43°C से 45°C के बीच दर्ज किया जा रहा है।
भीषण गर्मी और लू का प्रकोप
- प्रभावित क्षेत्र: IMD के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों (25 अप्रैल से 29 अप्रैल तक) में उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में लू चलने की प्रबल संभावना है।
- तापमान का स्तर: तापमान सामान्य से 3°C से 5°C तक अधिक होने का अनुमान है। कुछ क्षेत्रों में रात का तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है, जिसे ‘वॉर्म नाइट’ (Warm Night) की स्थिति कहा जाता है।
- प्रमुख कारण: इस तीव्र गर्मी के पीछे मुख्य रूप से शुष्क पश्चिमी हवाओं का चलना और बादलों की अनुपस्थिति (साफ आसमान) है, जो दिन के समय सूर्य की तेज किरणों के प्रभाव को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही, पिछले वर्षों के एल नीनो (El Nino) के अवशेषी प्रभावों ने भी इस बार गर्मी की तीव्रता और समय से पहले शुरुआत में भूमिका निभाई है।
2026 के मध्य में अल नीनो (El Nino) की वापसी का अनुमान न केवल तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि का कारण बनेगा, बल्कि यह दुनिया भर के कृषि, जल संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ी चुनौतियां भी पेश करेगा।
क्या है अल नीनो और यह कैसे काम करता है?
अल नीनो प्रशांत महासागर की एक जटिल मौसमी घटना है। जब मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का सतही तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो यह वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण (atmospheric circulation) को पूरी तरह बदल देता है। समुद्र की सतह के गर्म होने से व्यापारिक हवाएं (Trade Winds) कमजोर पड़ जाती हैं। यह घटना वैश्विक औसत तापमान में वृद्धि करती है, जिसका सीधा असर हम भीषण लू और गर्मी के रूप में देखते हैं। अल नीनो के कारण दुनिया के कुछ हिस्सों में अत्यधिक सूखा पड़ता है, जबकि अन्य इलाकों में विनाशकारी बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है।
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी: 2023-2024 का सबक
WMO के आंकड़े बताते हैं कि 2023 और 2024 में अल नीनो के प्रभाव ने पहले से ही गर्म होती पृथ्वी को और अधिक तपिश दी थी। 2024 का ‘सबसे गर्म साल’ बनने के पीछे इस मौसमी घटना का बड़ा योगदान था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अल नीनो फिर से सक्रिय होता है, तो 2026 में भी तापमान के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं।
भारत पर संभावित प्रभाव
अल नीनो के लौटने का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसे समझना जरूरी है। कृषि उपज में कमी आने से खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल और मुद्रास्फीति (inflation) का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर अल नीनो का असर भारतीय मानसून के लिए प्रतिकूल माना जाता है। इससे वर्षा में कमी और अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे कृषि उत्पादन पर दबाव पड़ सकता है। जैसे कि अभी उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में भीषण लू की स्थिति देखी जा रही है, अल नीनो की वापसी इन स्थितियों को और अधिक भयावह बना सकती है।
पूर्वानुमान का दूसरा पहलू: राहत की उम्मीद
हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत लू की चपेट में है, लेकिन देश के अन्य हिस्सों के लिए राहत की खबरें भी हैं:
- पूर्वोत्तर में भारी बारिश: IMD ने अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 25 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच ‘भारी से बहुत भारी’ बारिश की चेतावनी दी है।
- मानसून पर नजर: लंबी अवधि के पूर्वानुमानों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के इस वर्ष समय से पूर्व आने की संभावना जताई जा रही है, जो मई के मध्य तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दस्तक दे सकता है।


