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    यमुना एक्सप्रेस-वे से ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ तक, उत्तर प्रदेश में बिछा सड़कों का जाल

    उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में पिछले डेढ़ दशक में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। साल 2012 में यमुना एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन से शुरू हुआ यह सफर अब 2026 में 594 किलोमीटर लंबे ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ के पूरा होने के साथ एक नए शिखर पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश अब देश का ‘एक्सप्रेस-वे प्रदेश’ बन चुका है, जहां का विशाल नेटवर्क न केवल सफर की दूरी कम कर रहा है, बल्कि औद्योगिक विकास को भी गति दे रहा है।

    यमुना एक्सप्रेस-वे

    आधुनिक कनेक्टिविटी की शुरुआत (2012) यूपी में एक्सप्रेस-वे युग की वास्तविक शुरुआत 2012 में हुई थी। 165 किलोमीटर लंबा यह मार्ग ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ता है। इसने दिल्ली और ताज नगरी के बीच की दूरी को महज ढाई घंटे में समेट दिया। इसके बाद 302 किलोमीटर लंबे ‘आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे’ ने इस कड़ी को आगे बढ़ाया, जिसने राजधानी लखनऊ को दिल्ली के बेहद करीब ला खड़ा किया।

    पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे

    क्षेत्रीय विकास की नई राह राज्य के पूर्वी हिस्सों और पिछड़े माने जाने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की गईं:

    1. पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे (341 किमी): लखनऊ से गाजीपुर तक फैला यह मार्ग पूर्वी यूपी के आर्थिक विकास की जीवनरेखा बना है।
    2. बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे (296 किमी): इसने चित्रकूट से इटावा तक के दुर्गम इलाकों को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के जरिए सीधे दिल्ली से जोड़ दिया।

    गंगा एक्सप्रेस-वे 2026

    यूपी की नई लाइफलाइन : 2026 में शुरू होने वाला गंगा एक्सप्रेस-वे यूपी का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। यह मेरठ (पश्चिम) को प्रयागराज (पूर्व) से जोड़ता है।

    • लंबाई और मार्ग: 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक पहुंचेगा।
    • समय की बचत: मेरठ से प्रयागराज की 12 घंटे की दूरी अब मात्र 6-7 घंटे में पूरी की जा सकेगी।
    • विशेषता: शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर की एक हवाई पट्टी भी बनाई गई है, जिसका उपयोग आपात स्थिति में वायुसेना के विमानों की लैंडिंग के लिए किया जा सकेगा।

    एक्सप्रेस-वे जाल का आर्थिक प्रभाव

    इन एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) विकसित किए जा रहे हैं। इससे न केवल माल ढुलाई आसान हुई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। दिल्ली से सटे नोएडा से लेकर बिहार की सीमा (गाजीपुर) और मध्य प्रदेश की सीमा (चित्रकूट) तक अब एक निर्बाध सड़क नेटवर्क तैयार है।

    2012 से 2026 तक की इस यात्रा में यूपी ने कुल 6 प्रमुख एक्सप्रेस-वे और कई अन्य लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण कर अपनी तस्वीर बदल दी है। गंगा एक्सप्रेस-वे के चालू होने से उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी में वह आखिरी बड़ी कड़ी भी जुड़ गई है, जो राज्य के पश्चिमी और पूर्वी कोनों को आपस में जोड़ती है। यह बुनियादी ढांचा आने वाले दशकों में यूपी को ‘एक ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में मील का पत्थर साबित होगा।

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