सफलता कभी भी रातों-रात नहीं मिलती। इसके पीछे सालों का संघर्ष, रात-दिन की मेहनत और कभी हार न मानने का जज्बा छिपा होता है। मुंबई की एक छोटी सी झुग्गी (चॉल) से निकलकर जर्मनी में अपना बहुमंजिला अपार्टमेंट खरीदने तक का सफर तय करने वाले संतोष यादव की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है।
हाल ही में संतोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी पत्नी उपासना के साथ ‘पहले और अब’ (Then and Now) की तस्वीरें शेयर कीं, जिसने इंटरनेट पर हर किसी का ध्यान खींचा। इन 14 सालों में उन्होंने वह मुकाम हासिल किया है, जो किसी भी युवा के लिए एक बड़ा सपना होता है। संतोष आज एआई (AI) टूल्स बनाने के साथ-साथ भारत के पहले ‘गिटहब स्टार’ (GitHub Star) के रूप में जाने जाते हैं।
बचपन की चुनौतियां और अंग्रेजी का डर
संतोष का जन्म मुंबई में हुआ था और उनका बचपन ऐसी ही झुग्गी-बस्ती में बीता, जैसी अक्सर हम फिल्मों में देखते हैं। स्कूल के दिनों में वे पढ़ाई से ज्यादा क्रिकेट में दिलचस्पी रखते थे। 10वीं कक्षा में उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा। वह साइंस पढ़ना चाहते थे, लेकिन कम नंबरों के कारण उन्हें पिता के एक दोस्त की सलाह पर कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा कोर्स में दाखिला लेना पड़ा। हैरानी की बात यह थी कि तब तक उन्होंने कभी कंप्यूटर चलाया तक नहीं था।
शुरुआती पढ़ाई हिंदी मीडियम से होने के कारण अंग्रेजी उनके लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थी। संतोष बताते हैं कि एक बार क्लास में अंग्रेजी समझ न आने के कारण वे रो पड़े थे, क्योंकि उन्हें फिर से फेल होने का डर सता रहा था। लेकिन इसी डर ने उन्हें कड़ी मेहनत करने पर मजबूर किया। उन्होंने क्रिकेट खेलना छोड़ दिया, दोस्तों से दूरी बनाई और पूरी तरह से पढ़ाई में जुट गए, जिससे उनके नंबरों में जबरदस्त सुधार आया।
आर्थिक तंगी और माँ का अटूट विश्वास
डिप्लोमा के बाद जब संतोष कंप्यूटर साइंस (CS) की डिग्री कर रहे थे, तब कॉलेज के दूसरे साल में उनके पिता की नौकरी चली गई। उस समय कॉलेज की फीस सालाना करीब 42,000 रुपये थी। पिता ने मजबूरी में उनसे पढ़ाई छोड़कर नौकरी ढूंढने को कहा। संतोष उस रात बहुत रोए, लेकिन अगले दिन उनकी माँ उनके समर्थन में ढाल बनकर खड़ी हो गईं। उन्होंने कहा, “तुम्हें जो करना है करो, लेकिन मेरा बेटा अपनी पढ़ाई जरूर पूरी करेगा।”
पैसे की तंगी इतनी थी कि संतोष किताबें तक नहीं खरीद पाते थे। वे लाइब्रेरी और अपने प्रोफेसर्स की मदद से किताबें उधार लेकर पढ़ते थे और आखिरकार अपनी डिग्री पूरी करने में सफल रहे।
5,000 रुपये से शुरू हुआ करियर और शानदार वापसी
साल 2007 में संतोष ने उपासना से शादी की। शुरुआती जीवन बेहद गरीबी में बीता। बारिश के दिनों में उनके घर की छत से पानी टपकता था, लेकिन उनकी पत्नी ने हर मुश्किल में उनका पूरा साथ दिया।
पहली नौकरी और संघर्ष-2007-2009 : आर्थिक मंदी के उस दौर में उन्हें मात्र ₹5,000 प्रति माह की सैलरी पर अपनी पहली नौकरी मिली।
स्किल्स में सुधार-2010 – 2011 : ₹12,000 महीने की सैलरी पर C# में विंडोज एप्लिकेशन के लिए कोडिंग शुरू की। काम कम होने पर खाली समय में अपनी कोडिंग स्किल्स (SQL और C#) को निखारा और 2011 में एक स्टार्टअप जॉइन किया।
ग्लोबल पहचान (GDE)- 2019 : अपने पक्के इरादे और कोडिंग स्किल्स के दम पर, Angular फ्रेमवर्क पर बेहतरीन काम करने के कारण उन्हें ‘Google Developer Expert’ के तौर पर मान्यता मिली।
भारत के पहले GitHub Star-2020 : कोडिंग और ओपन-सोर्स कम्युनिटी में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें भारत के पहले ‘GitHub Star’ के खिताब से नवाजा गया।
इस सफलता के बीच भी जिंदगी ने कई इम्तिहान लिए। बेटी की अस्पताल में इमरजेंसी डिलीवरी, स्कूल के खर्चों और यहां तक कि टीबी (TB) की बीमारी के इलाज के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा, लेकिन संतोष ने वह सारा कर्ज अपने दम पर चुकाया।
प्रेरणा: आज संतोष यादव 36 साल की उम्र में जर्मनी में सेटल हैं और अपने परिवार के साथ एक खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं। उनका सफर हमें सिखाता है कि इंसान के इरादे अगर मजबूत हों, तो किस्मत को भी हार माननी पड़ती है।


