विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह बयान पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये (Hypocrisy) पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार माना जा रहा है। फिनलैंड में आयोजित ‘कुल्तारांता वार्ता’ (Kultaranta Talks) के दौरान उन्होंने इस कड़वी सच्चाई को वैश्विक मंच पर रखा। भारत ने एक बार फिर पश्चिमी देशों को आईना दिखाया है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय हथियारों की आपूर्ति और रूस के साथ भारत के संबंधों पर उठाए जा रहे सवालों पर बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत ने कभी भी यूरोप की सुरक्षा के लिए कोई खतरा पैदा नहीं किया है, इसलिए यूरोप को भारत की नीतियों पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर याद दिलाया कि यूरोप ने दशकों से ऐसे देशों (विशेषकर पाकिस्तान) को धड़ल्ले से आधुनिक हथियार बेचे हैं, जिनका इस्तेमाल सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता पर हमला करने और आतंकवाद फैलाने के लिए किया गया। जयशंकर का इशारा साफ था कि जो देश खुद भारत को नुकसान पहुंचाने वाले हथियारों की सप्लाई करते रहे हैं, वे आज भारत को नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ा सकते।
यूरोपीय पाखंड पर जयशंकर का सीधा प्रहार
मंच पर जब यूरोपीय देशों द्वारा भारत को हथियारों की आपूर्ति और रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर सवाल उठाए गए, तो विदेश मंत्री ने उसे ‘पाखंड’ करार दिया। जयशंकर ने दो-टूक लहजे में कहा, “इतिहास गवाह है कि भारत ने कभी भी यूरोप के हितों या उसकी सुरक्षा को नुकसान नहीं पहुंचाया है। इसके विपरीत, जब भी वैश्विक संकट आए हैं, भारत ने हमेशा एक जिम्मेदार राष्ट्र की भूमिका निभाई है।”
रूसी तेल की खरीद पर दिया तर्क
पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों और भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने की आलोचना पर विदेश मंत्री ने पुराना और मजबूत तर्क दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत का पहला कर्तव्य अपने नागरिकों के प्रति है। यदि यूरोप अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नियम बदल सकता है, तो भारत को भी अपने बाजार और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनी रही, जिससे यूरोप को भी परोक्ष रूप से फायदा हुआ है।
‘यूरोप की समस्या पूरी दुनिया की समस्या नहीं’
विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोप को इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा कि “उसकी समस्याएं पूरी दुनिया की समस्याएं हैं, लेकिन दुनिया की समस्याएं यूरोप की समस्याएं नहीं हैं।” उन्होंने साफ किया कि भारत किसी भी दबाव में आकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति (Strategic Autonomy) से समझौता नहीं करेगा।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का संकल्प
हथियारों की आपूर्ति के सवाल पर उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत तेजी से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Make in India) की ओर बढ़ रहा है। भारत अब केवल आयातक देश नहीं रहा, बल्कि अपनी सुरक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने और मित्र देशों को निर्यात करने की क्षमता विकसित कर रहा है।
जयशंकर का यह बयान साफ करता है कि आज का भारत अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को लेकर पूरी तरह अडिग है और वैश्विक मंचों पर किसी भी तरह के दोहरे मानदंडों को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।


