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    मंदिर तोड़ना इस्लाम नहीं है! ‘बंटवारा 1947’ का ट्रेलर रिलीज, सनी देओल का दमदार अंदाज

    आमिर खान प्रोडक्शंस और निर्देशक राजकुमार संतोषी की बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म ‘बंटवारा 1947’ (पूर्व नाम: लाहौर 1947) का आधिकारिक ट्रेलर जारी कर दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही यह फिल्म 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दर्दनाक इतिहास, मानवीय संवेदनाओं और आपसी भाईचारे की दास्तान को पर्दे पर जीवंत करती है।

    ​दिल को छू लेने वाले संवाद और सनी देओल का रौद्र रूप

    ​लगभग तीन मिनट लंबे इस ट्रेलर की शुरुआत विभाजन की त्रासदी और बेघर होते लोगों की चीखों से होती है। फिल्म में सनी देओल ‘सिकंदर मिर्जा’ के किरदार में नजर आ रहे हैं, जो विभाजन के बाद लखनऊ से लाहौर स्थानांतरित होते हैं। ट्रेलर में सनी देओल का ट्रेडमार्क एक्शन अवतार देखने को मिलता है, लेकिन इस बार उनका यह गुस्सा नफरत पर नहीं, बल्कि इंसानियत को बचाने के लिए है।

    ​ट्रेलर का सबसे प्रभावशाली मोड़ तब आता है जब उग्र भीड़ एक बुजुर्ग हिंदू महिला (शबाना आजमी द्वारा अभिनीत) और उनके घर के मंदिर पर हमला करने की कोशिश करती है। इस पर सनी देओल कड़क आवाज में दहाड़ते हुए कहते हैं— “मंदिर तोड़ना इस्लाम नहीं है!”

    ​इसके साथ ही मां के प्रति सम्मान और मानवीय धर्म को रेखांकित करता हुआ संवाद गुंजायमान होता है: “हर बच्चे का पहला मजहब मां होता है, और मां अपने आप में एक मजहब है।”

    ​फिल्म की स्टार कास्ट और मुख्य कलाकार

    ​फिल्म की स्टार कास्ट काफी दमदार है, जिसमें बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकार एक साथ नजर आ रहे हैं:

    • सनी देओल: सिकंदर मिर्जा के मुख्य किरदार में।
    • शबाना आजमी: दुर्गावती देवी (‘माई’) के भावुक किरदार में।
    • प्रीति जिंटा: हमीदा बेगम (सिकंदर की पत्नी) के रूप में।
    • करण देओल: जावेद मिर्जा (सिकंदर के बेटे) के किरदार में।
    • अन्य कलाकार: अली फजल (हबीब अनवर) और अभिमन्यु सिंह (याकूब खान) मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    ​नाटक ‘जिस लाहौर नई देख्या’ पर आधारित कहानी

    ​यह फिल्म प्रसिद्ध नाटककार सैयद असगर वजाहत के बहुचर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई देख्या ओ जम्याई नई’ पर आधारित है। कहानी एक ऐसे मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो विभाजन के दौरान लाहौर की एक हवेली में रहने जाता है। वहां उन्हें एक वृद्ध हिंदू महिला मिलती है जो अपना घर छोड़ने से मना कर देती है। शुरुआती मतभेदों के बाद, परिवार और उस महिला के बीच एक अटूट मानवीय रिश्ता और सह-अस्तित्व की भावना पनपती है।

    संगीत और निर्देशन: फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जो सनी देओल के साथ लगभग 30 साल बाद (‘घायल’, ‘दामिनी’, ‘घातक’ के बाद) वापसी कर रहे हैं। फिल्म का संगीत ऑस्कर विजेता ए.आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि इसके मार्मिक बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं।

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