संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार की घेराबंदी करने की रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के 10 जनपथ स्थित आवास पर गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस ने मोदी सरकार द्वारा लाए जा रहे आगामी परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) का संसद में पुरजोर विरोध करने का बड़ा एलान किया है।
विरोध के पीछे कांग्रेस के तर्क
कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) का मानना है कि परिसीमन को लेकर सरकार की जल्दबाजी राजनीतिक लाभ से प्रेरित है। बैठक में जिन प्रमुख बिंदुओं पर विरोध दर्ज कराने पर सहमति बनी, वे निम्नलिखित हैं:
- महिला आरक्षण को लटकाने का आरोप: कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को परिसीमन और जनगणना की शर्तों से जोड़कर सरकार इसे जानबूझकर टाल रही है। पार्टी की मांग है कि महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
- दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय: बैठक में इस बात पर गंभीर चिंता जताई गई कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक) को भारी नुकसान होगा। इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतरीन काम किया है, लेकिन नई व्यवस्था से उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं, जो देश के संघीय ढांचे (Federal Balance) के खिलाफ है।
- जाति जनगणना की मांग: कांग्रेस नेताओं ने दोहराया कि सरकार एक नए जातिगत जनगणना (Caste Census) के काम को टालने के लिए परिसीमन का सहारा ले रही है, जबकि देश को पहले एक पारदर्शी जातिगत आंकड़े की जरूरत है।
इन मुद्दों पर भी हुआ मंथन
सोनिया गांधी के घर हुई इस रणनीतिक बैठक में केवल परिसीमन ही नहीं, बल्कि मानसून सत्र में सरकार को घेरने के लिए कई अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा हुई:
- महंगाई और बेरोजगारी: देश में बढ़ती आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और युवाओं में बेरोजगारी के मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में आक्रामक तरीके से उठाने का फैसला लिया गया।
- सीमा सुरक्षा और विदेश नीति: हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और देश की सीमाओं की सुरक्षा स्थिति को लेकर भी विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा।
रणनीति का संदेश: इस बैठक के जरिए कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह आगामी सत्र में सरकार को वॉकओवर देने के मूड में बिल्कुल नहीं है। पार्टी इस मुद्दे पर अन्य समान विचारधारा वाले क्षेत्रीय दलों को भी एकजुट करेगी ताकि संसद के भीतर परिसीमन बिल पर सरकार को कड़े विरोध का सामना करना पड़े।


