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    हालात ने मूर्ति बना दिया, वरना हम भी..! गोल्डन स्टैच्यू रजनीश का संघर्ष और कहानी

    दिल्ली के दिल, कनॉट प्लेस (CP) में ‘लिविंग स्टैच्यू’ (जीवित मूर्ति) बनकर खड़े होने वाले कलाकार रजनीश के संघर्ष और उनकी अटूट इच्छाशक्ति की हृदयस्पर्शी कहानी बयां करता है। रजनीश की कहानी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो जीवन की बड़ी से बड़ी हार के बाद भी हार नहीं मानते।


    रजनीश कलाकार: 15 लाख का घाटा और दोस्त का धोखा

    कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में यदि आपने एक सुनहरे रंग की अचल मूर्ति देखी है जो घंटों बिना हिले-डुले खड़ी रहती है, तो वह रजनीश हैं। उनकी यह कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गहरे दर्द और जिम्मेदारी से उपजी मजबूरी भी है।

    संघर्ष की शुरुआत: फर्श से अर्श और फिर गिरावट

    रजनीश कभी एक सफल इवेंट मैनेजर हुआ करते थे। उनकी जिंदगी पटरी पर थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था:

    • दोस्त का विश्वासघात: रजनीश ने अपने एक करीबी दोस्त पर भरोसा कर भारी निवेश किया था, लेकिन उस दोस्त ने उन्हें धोखा दे दिया।
    • 15 लाख का कर्ज: व्यापार में हुए घाटे और धोखे के कारण रजनीश पर 15 लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया। रातों-रात वे सफलता के शिखर से सड़क पर आ गए।

    12 घंटे ‘मूर्ति’ बनने का कठिन सफर

    कर्ज चुकाने और अपने परिवार का पेट पालने के लिए रजनीश ने एक ऐसा रास्ता चुना जिसे अपनाना हर किसी के बस की बात नहीं है।

    1. कठिन साधना: रजनीश चिलचिलाती धूप और कड़ाके की ठंड में लगातार 10 से 12 घंटे तक एक ही मुद्रा में खड़े रहते हैं। इस दौरान वे न तो बात करते हैं और न ही हिलते हैं।
    2. शारीरिक कष्ट: घंटों तक बिना हिले खड़े रहने से पैरों में सूजन और शरीर में जकड़न जैसी समस्याएं आम हैं, लेकिन अपने लक्ष्य के सामने वे इन तकलीफों को भूल जाते हैं।
    3. चेहरे पर मुस्कान: इतने दर्द के बावजूद, जब कोई बच्चा या पर्यटक उनके साथ फोटो खिंचवाता है, तो वे अपनी कला के माध्यम से उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करते हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल और लोगों का समर्थन

    हाल ही में रजनीश का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई। इस वीडियो ने हजारों लोगों की आंखों में आंसू ला दिए।

    • कलाकार का सम्मान: लोग अब उन्हें केवल एक ‘स्टैच्यू’ के रूप में नहीं, बल्कि एक योद्धा के रूप में देख रहे हैं।
    • उनकी कहानी हमें सिखाती है कि चाहे दुनिया आपका साथ छोड़ दे या धन चला जाए, आपकी कला और मेहनत ही आपको दोबारा खड़ा कर सकती है।

    रजनीश की कहानी कनॉट प्लेस की चकाचौंध के पीछे छिपे उस अंधेरे और संघर्ष को उजागर करती है जिससे कई कलाकार गुजरते हैं। 15 लाख का घाटा और दोस्त का धोखा मिलने के बाद भी रजनीश ने भीख नहीं मांगी, बल्कि अपनी मेहनत और कला का रास्ता चुना। आज वे न केवल अपना कर्ज उतार रहे हैं, बल्कि ईमानदारी से जीने का एक बड़ा संदेश भी दे रहे हैं।

    “हालात ने मूर्ति बना दिया, वरना हम भी कभी महफिलों की जान हुआ करते थे।” — यह पंक्तियाँ रजनीश के जीवन पर सटीक बैठती हैं।

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