ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के 131 दिन बाद उनके अंतिम संस्कार और सुपुर्द-ए-खाक (दफन) की प्रक्रिया पूरी होने जा रही है। इस पूरी यात्रा और आयोजन से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
1. मौत और 131 दिन का लंबा इंतजार
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए एक हमले में हुई थी। इस हमले में उनके परिवार के कई अन्य सदस्यों की भी जान चली गई थी। उनकी मृत्यु के पूरे 131 दिन बाद अब आगामी 9 जुलाई, 2026 को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
छह दिन और 3,000 किलोमीटर की अंतिम यात्रा
खामेनेई की अंतिम यात्रा काफी भव्य और व्यापक होने वाली है। यह सफर कुल छह दिनों का होगा, जिसमें पाँच शहरों को कवर किया जाएगा और लगभग 3,000 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी।
- शुरुआत (तेहरान): इस यात्रा की शुरुआत राजधानी तेहरान के ‘इमाम खुमैनी मुसल्ला’ से होगी। यह परिसर ईरान में बड़े राजकीय और धार्मिक आयोजनों का मुख्य केंद्र है। यहाँ आम जनता और नेताओं के दर्शन व शोक व्यक्त करने के लिए उनके पार्थिव शरीर को तीन दिनों तक रखा जाएगा।
- इराक को शामिल करना: इराकी जनजातियों, धार्मिक विद्वानों और राजनेताओं के विशेष अनुरोध पर इस अंतिम यात्रा के मार्ग में इराक को भी शामिल किया गया है। इसी कारण इस पूरी प्रक्रिया में छह दिन का समय लग रहा है।
- अन्य पवित्र शहर: इराक के बाद यह शव यात्रा ईरान के अन्य बेहद पवित्र शिया शहरों—कौम (Qom) और मशहद (Mashhad) पहुंचेगी।
धार्मिक और रणनीतिक महत्व
सुपुर्द-ए-खाक के लिए 9 जुलाई का दिन बेहद सोच-समझकर चुना गया है। यह समय शिया मुसलमानों के पवित्र शोक के महीने मुहर्रम के साथ मेल खाता है। इसके अलावा, 9 जुलाई को इस्लाम के चौथे इमाम, इमाम सज्जाद की शहादत की बरसी की पूर्व संध्या भी है, जिससे इस आयोजन की धार्मिक अहमियत और ज्यादा बढ़ जाती है।
मोजतबा खामेनेई और सुरक्षा का बड़ा खतरा
इस पूरी घटनाक्रम में अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई की भूमिका और उनकी सुरक्षा को लेकर भी बड़ी चर्चा है।
- हमले के दौरान मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे लेकिन उनकी जान बच गई थी। अमेरिकी और कुवैती मीडिया रिपोर्ट्स के दावों के अनुसार, मोजतबा की कई सर्जरी हुई हैं और रूस (मॉस्को) में उनका गुपचुप इलाज भी चला है। हालांकि ईरान ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
- युद्ध की स्थिति बनने के बाद से ही मोजतबा पूरी तरह से छिपकर देश की कमान संभाल रहे हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि 9 जुलाई को मशहद में होने वाला यह अंतिम संस्कार पहले से घोषित कार्यक्रम है। ऐसे में अपने पिता के जनाजे में शामिल होने के लिए मोजतबा का वहां पहुंचना उनके लिए एक बहुत बड़ा सुरक्षा जोखिम (टारगेट) साबित हो सकता है।


