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    होर्मुज में जहाज पर हमला, ईरान-खाड़ी देशों के बीच वार्ता टली, स्थिति और तनावपूर्ण

    पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब ईरान और खाड़ी देशों के बीच प्रस्तावित वार्ता टाल दी गई। यह बैठक ओमान की मेजबानी में 14 सितंबर को होनी थी और इसमें रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर चर्चा होनी थी। बैठक टलने के पीछे क्षेत्रीय देशों के बीच सहमति की कमी को प्रमुख कारण बताया गया है। इसी बीच होर्मुज के पास एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हमला होने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

    जहाज पर हमले में एक की मौत

    ईरानी मीडिया के मुताबिक, क़ेशम द्वीप के पास एक ईरानी कार्गो जहाज को निशाना बनाया गया। हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि चार अन्य घायल बताए गए हैं। हमले की जिम्मेदारी तत्काल स्पष्ट नहीं हुई है। ईरान ने इसे दुश्मन की कार्रवाई बताया है, जबकि अमेरिका ने घटना में अपनी भूमिका की पुष्टि नहीं की है। इस घटना ने पहले से ही संवेदनशील समुद्री मार्ग पर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में बाधा का सीधा असर कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है। हालिया घटनाक्रम के बाद तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई।

    क्यों टली ईरान-खाड़ी देशों की बैठक?

    ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी के अनुसार, बैठक को सहमति बनाने के हित में स्थगित किया गया है। ईरानी पक्ष ने भी संकेत दिया कि कुछ क्षेत्रीय देशों के अनुरोध के बाद बैठक को टाला गया। हालांकि, किसी नए तारीख की घोषणा नहीं की गई है।

    बैठक का उद्देश्य ईरान और ओमान के बीच होर्मुज से सुरक्षित नौवहन को लेकर बनी व्यवस्था को व्यापक क्षेत्रीय समर्थन दिलाना था। प्रस्ताव के तहत जहाजों की आवाजाही के लिए एक अस्थायी सुरक्षित मार्ग तैयार करने और समुद्री यातायात को व्यवस्थित करने पर चर्चा होनी थी। लेकिन खाड़ी देशों के बीच इस प्रस्ताव को लेकर पूरी सहमति नहीं बन पाई।

    सऊदी अरब और बहरीन की चिंताएं

    वार्ता में दरार की एक वजह खाड़ी देशों की ईरान को लेकर अलग-अलग चिंताएं भी हैं। बहरीन ने बैठक में शामिल होने से इनकार किया था। वहीं सऊदी अरब को ईरान-ओमान के बीच प्रस्तावित व्यवस्था के दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर आपत्ति बताई गई है। ऐसे में बैठक में सभी प्रमुख देशों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो सकी।

    इस बीच क्षेत्र में अन्य हमलों ने भी तनाव बढ़ा दिया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं। सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हमले के बाद उसके संचालन पर भी असर पड़ा है। यह पाइपलाइन होर्मुज से बचकर तेल निर्यात का वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराती है।

    दुनिया की नजर होर्मुज पर

    होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहां लंबे समय तक अस्थिरता रहने पर कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है। बैठक का टलना ऐसे समय हुआ है जब समुद्री यातायात पहले ही सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रभावित है।

    ईरान और खाड़ी देशों के बीच बातचीत की कोशिश को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा था। लेकिन जहाज पर हमला और देशों के बीच सहमति की कमी ने इस प्रक्रिया को फिलहाल झटका दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ओमान दोबारा वार्ता के लिए कब नई तारीख तय करता है और क्या सभी खाड़ी देश सुरक्षित समुद्री मार्ग को लेकर किसी साझा व्यवस्था पर सहमत हो पाते हैं।

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