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    पंजाब चुनाव के लिए अहम हैं हरदीप सिंह पुरी, मोदी कैबिनेट में बने रहेंगे? यह रास्ता तलाशेगी BJP

    भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों की घोषणा कर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। खास बात यह है कि इस सूची में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा का नाम नहीं है। दोनों का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में पुरी के भविष्य और मोदी कैबिनेट में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    पुरी प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट में प्रमुख सिख चेहरों में शामिल हैं। अगले साल उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है कि पार्टी पंजाब चुनाव के मद्देनजर उनकी भूमिका पर अलग से विचार कर सकती है। फिलहाल बीजेपी ने पुरी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें आगे किस सदन से संसद में लाया जाएगा या कैबिनेट में उनकी जिम्मेदारी क्या होगी। लेकिन यूपी की राज्यसभा सूची में नाम न होने के बावजूद उनके राजनीतिक भविष्य पर अंतिम फैसला अभी बाकी माना जा रहा है।

    यूपी की सूची में सभी नए चेहरे

    बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्याधर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने इस बार मौजूदा किसी भी बीजेपी राज्यसभा सदस्य को दोबारा टिकट नहीं दिया।

    उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी जोर दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक सूची में ओबीसी, दलित और सवर्ण समुदायों का प्रतिनिधित्व रखा गया है। इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    क्या राज्यसभा टिकट न मिलने का मतलब कैबिनेट से विदाई है?

    हरदीप सिंह पुरी को राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब उन्हें मोदी कैबिनेट से भी बाहर किया जाएगा। संवैधानिक प्रावधान के मुताबिक कोई व्यक्ति सांसद बने बिना अधिकतम छह महीने तक मंत्री पद पर रह सकता है। इसलिए 25 नवंबर को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद भी तत्काल मंत्री पद छोड़ना जरूरी नहीं होगा। इस अवधि में उन्हें संसद के किसी सदन में लाने का रास्ता तलाशा जा सकता है।

    यही वजह है कि पुरी के राज्यसभा टिकट से बाहर होने को सीधे तौर पर उनकी कैबिनेट से विदाई मानना जल्दबाजी होगी। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में बीजेपी से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की सूची मुख्य रूप से 2027 के विधानसभा चुनाव के सामाजिक और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

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