केंद्र सरकार संसद के एक विशेष सत्र (Special Parliament Session) के आयोजन को लेकर बेहद सक्रिय नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस संभावित विशेष सत्र के प्रमुख एजेंडे में परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) शामिल है। इस विधेयक को पास कराने और राजनीतिक सहमति बनाने की दिशा में गृह मंत्री अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाल लिया है।
परिसीमन विधेयक और दक्षिणी राज्यों की चिंताएं
देश में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन (परिसीमन) को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही है। परिसीमन का मुख्य आधार आबादी को माना जाता है, जिससे दक्षिणी राज्यों में एक बड़ा राजनीतिक संदेह पैदा हुआ है:
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व का डर: तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों ने बीते दशकों में जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया है।
- उत्तर बनाम दक्षिण का मुद्दा: दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन किया गया, तो उत्तर भारत के राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या तेजी से बढ़ेगी, जबकि दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी घट जाएगी। इससे केंद्र की राजनीति में दक्षिण का प्रभाव कम हो सकता है।
गृह मंत्री अमित शाह का दक्षिणी दौरा
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों में उठ रहे विरोध और आशंकाओं को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों का दौरा किया और स्थिति की टोह ली:
- राजनीतिक नब्ज टटोलना: शाह ने स्थानीय नेताओं, हितधारकों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं ताकि परिसीमन को लेकर जमीनी स्थिति और क्षेत्रीय असंतोष का आकलन किया जा सके।
- आशंकाओं को दूर करने की कोशिश: केंद्र सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि परिसीमन प्रक्रिया से किसी भी राज्य के साथ अन्याय या राजनीतिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
- आम सहमति का प्रयास: विशेष सत्र में विधेयक लाने से पहले सरकार विपक्षी दलों और क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच एक न्यूनतम सहमति बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
विशेष संसद सत्र का महत्व
यदि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाती है, तो परिसीमन विधेयक के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और नीतिगत फैसलों को पटल पर रखा जा सकता है। परिसीमन की प्रक्रिया वर्ष 2026 या उसके बाद की जनगणना आंकड़ों के आधार पर लागू होनी है। ऐसे में सरकार कानूनी ढांचा पहले ही तैयार कर लेना चाहती है। इस विधेयक के संसद में आने से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सीटों के संतुलन पर एक गरमा-गरम और व्यापक बहस देखने को मिल सकती है। सरकार की मंशा साफ है कि परिसीमन जैसे संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाले विषय पर जल्दबाजी के बजाय राजनीतिक रणनीतियों और संवाद के माध्यम से आगे बढ़ा जाए।


