भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक वार्ताओं के बीच एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत सहित दुनिया के 60 देशों (अर्थव्यवस्थाओं) पर नए अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) लगाने का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका ने इन देशों पर ‘जबरन श्रम’ (Forced Labour) से बने सामानों के आयात को रोकने में विफल रहने का गंभीर और विवादित आरोप लगाया है।
क्या है USTR का दावा और नया टैरिफ प्लान?
- लगाए गए आरोप: USTR के प्रमुख जेमिसन ग्रीर ने कहा कि भारत समेत 54 ऐसे देश हैं जो अपने यहां जबरन श्रम से बनने वाली वस्तुओं के आयात पर कानूनी प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि इससे अमेरिकी कामगारों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
- टैरिफ की दरें: अमेरिकी प्रशासन ने कानून की धारा 301 (Section 301) के तहत जांच के बाद यह कदम उठाया है। जिन देशों के पास आंशिक प्रतिबंध व्यवस्था है, उन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। वहीं, भारत, चीन, जापान, ब्राजील, और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर 12.5% का भारी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है।
- कपड़ा क्षेत्र के लिए अलग नियम: कपड़ों और टेक्सटाइल के आयात के लिए एक अलग ‘टेक्सटाइल मैकेनिज्म’ भी प्रस्तावित किया गया है।
भारत का कड़ा रुख और प्रतिक्रिया
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने अमेरिका द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज (Deny) कर दिया है। नई दिल्ली ने वाशिंगटन से इस एकतरफा जांच को तुरंत बंद करने की मांग की है। भारत का मानना है कि ऐसे मुद्दों को एकतरफा कार्रवाई के बजाय द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
द्विपक्षीय व्यापार वार्ता पर संकट के बादल
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी सहायक USTR ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली के दौरे पर है। दोनों देश एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के आखिरी चरण को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत इस व्यापार समझौते में धारा 301 के तहत होने वाली जांचों से राहत और कम टैरिफ की मांग पर अड़ा हुआ है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ‘रेसिप्रोकल टैरिफ पॉलिसी’ को झटका दिए जाने के बाद प्रशासन अब इस नए तरीके से टैरिफ एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है।
आगे क्या होगा?
यह नया टैरिफ तुरंत प्रभाव से लागू नहीं हो रहा है। USTR ने इस पर जनता और प्रभावित देशों से लिखित टिप्पणियां मांगी हैं, जिन्हें जमा करने की अंतिम तारीख 6 जुलाई है। इसके बाद 7 जुलाई से इस मुद्दे पर सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearings) शुरू होगी, जिसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।


