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    अमेरिका युद्ध में डटा, NATO तमाशा देख रहा, ट्रंप ने बताया कागजी शेर, हमारे बिना कुछ नहीं

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक तेवरों से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच ट्रंप ने न केवल अपने सहयोगियों को आड़े हाथों लिया, बल्कि नाटो (NATO) को “कागजी शेर” तक करार दे दिया।

    नाटो पर तीखा हमला: “अमेरिका के बिना NATO कुछ नहीं”

    ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहयोगी देशों, विशेषकर यूरोपीय देशों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका ईरान के खिलाफ मोर्चे पर डटा है, तब नाटो देश केवल तमाशा देख रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि नाटो केवल कागजों पर एक ताकतवर संगठन है, लेकिन वास्तविक संकट के समय यह पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है। ट्रंप इस बात से नाराज दिखे कि कई नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ सैन्य गठबंधन में शामिल होने से मना कर दिया है।


    होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और वैश्विक व्यापार

    ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए दुनिया को चेतावनी दी। यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा है, जिसे ईरान ने आंशिक रूप से बाधित कर रखा है।

    • चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को खरी-खोटी: ट्रंप ने कहा कि इन देशों की ऊर्जा आपूर्ति सबसे अधिक खाड़ी देशों (Gulf countries) पर निर्भर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तेल इन देशों को चाहिए, तो इसकी सुरक्षा का खर्च और जोखिम केवल अमेरिका क्यों उठाए?
    • “अपना तेल खुद बचाओ”: ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इन देशों को होर्मुज से सुरक्षित रास्ता चाहिए, तो उन्हें अपनी नौसेना भेजनी होगी और इस अभियान का हिस्सा बनना होगा।

    ईरान युद्ध और युद्धविराम की स्थिति

    ट्रंप ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी दावा किया कि ईरान ने युद्धविराम (Ceasefire) की अपील की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तब तक नहीं रुकेगा जब तक ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को पूरी तरह बंद नहीं कर देता और होर्मुज का रास्ता साफ नहीं हो जाता। ट्रंप ने संकेत दिया कि अगले 2-3 हफ्तों में हमला और तेज हो सकता है, जिसमें ईरान के बिजली केंद्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा।


    वैश्विक प्रतिक्रिया

    ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मच गई है। ब्रिटेन ने 35 देशों की एक बैठक बुलाने की घोषणा की है (जिसमें अमेरिका शामिल नहीं है), ताकि होर्मुज संकट का समाधान निकाला जा सके। वहीं, ईरान ने ट्रंप के दावों को झूठा बताते हुए कहा है कि वे लंबे युद्ध के लिए तैयार हैं।

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