उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला है। सपा मुखिया द्वारा अपने पूर्व सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और उसके नेतृत्व को लेकर दिए गए ‘चवन्नी से रुपया बना दिया’ वाले बयान को मायावती ने अमर्यादित, अशोभनीय और अति-शर्मनाक करार दिया है।
मायावती ने कहा कि इस तरह की अहंकारी और अलोकतांत्रिक बयानबाजी के लिए सपा नेतृत्व को रालोद, उसके नेता, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार और पूरे जाट समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
- अहंकारी और जातिवादी सोच का आरोप
- बसपा प्रमुख ने कहा कि सपा का इतिहास अपने सहयोगियों के साथ विश्वासघात और संकीर्ण राजनीति करने का रहा है। सपा केवल अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए गठबंधन करती है और काम निकलते ही ‘गिरगिट’ की तरह रंग बदल लेती है।
- जाट समाज और किसान नेताओं का अपमान: मायावती के अनुसार, चौधरी चरण सिंह की विरासत और जाट बहुल रालोद के बारे में ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना किसान वर्ग और जाट समाज के स्वाभिमान पर चोट है।
- 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का जिक्र: सपा के अलोकतांत्रिक रवैये पर बात करते हुए उन्होंने 1993 के सपा-बसपा गठबंधन के टूटने और 2 जून 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि सपा की अहंकारी मानसिकता के कारण ही वह ऐतिहासिक गठबंधन टूटा था।
- PDA राजनीति पर उठाए सवाल: अखिलेश यादव के ‘PDA’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए ‘P’ का मतलब कभी पिछड़ा तो कभी पंडित (ब्राह्मण) बताती है। सच्चाई यह है कि सपा की सरकारों में दलितों, पिछड़ों और विशेषकर ब्राह्मण समाज का उत्पीड़न हुआ है और केवल अराजक तत्वों को बढ़ावा मिला है।
- जनता से सपा को सत्ता से दूर रखने की अपील: मायावती ने उत्तर प्रदेश के सर्वसमाज और मतदाताओं से अपील की है कि वे सपा की जातिवादी और अवसरवादी राजनीति से सावधान रहें और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सपा को सत्ता से दूर रखें।
राजनीतिक मायने
मायावती का यह आक्रामक बयान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। जाट और दलित वोट बैंक को साधने के लिए मायावती ने सपा को किसान-विरोधी और अहंकारी दिखाने का दांव चला है, जिससे आने वाले चुनाव से पहले सपा और अन्य विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।


