भारतीय वायुसेना (IAF) के एक सेवारत विंग कमांडर को रक्षा से जुड़ी अति-संवेदनशील और गोपनीय जानकारी पाकिस्तान को लीक करने के गंभीर आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारी सोशल मीडिया पर एक महिला पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) द्वारा बिछाए गए ‘हनी ट्रैप’ का शिकार हो गया था। अधिकारी के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (सरकारी गोपनीयता कानून) के तहत मामला दर्ज किया गया है और पुलिस जांच पूरी होने के बाद 30 जुलाई 2026 को सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल कर दिया गया है।
कैसे हुआ मामले का पर्दाफाश?
- निजी जिंदगी का उठाया फायदा: पुलिस और खुफिया सूत्रों के अनुसार, विंग कमांडर अपने व्यक्तिगत जीवन में एक मुश्किल दौर से गुजर रहा था। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक महिला यूजर के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर ने उससे संपर्क साधा। चैटिंग और वीडियो कॉल के जरिए भरोसा जीतने के बाद महिला ने अधिकारी से सैन्य ठिकानों, यूनिट्स की आवाजाही और संवेदनशील दस्तावेजों की तस्वीरें व डेटा मांगना शुरू किया।
- IAF इंटेलिजेंस की सक्रिय निगरानी: पश्चिमी सीमा (Western Front) की एक फील्ड यूनिट में तैनात इस अधिकारी की संदिग्ध सोशल मीडिया गतिविधियों पर वायुसेना की अपनी इंटेलिजेंस विंग काफी समय से नजर रख रही थी। जब अधिकारियों को डिजिटल माध्यमों से संवेदनशील फाइलें लीक होने की पुष्टि हुई, तो तुरंत दिल्ली पुलिस से संपर्क साधा गया।
- साथी के फोन में स्पाइवेयर इंस्टॉल करने का आरोप: खुफिया जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ कि विदेशी हैंडलर के कहने पर अधिकारी ने अपने ही एक साथी वायुसेना कर्मी के मोबाइल फोन में डेटा चुराने वाला ऐप (Targeted Spyware/Malware) इंस्टॉल करने की कोशिश की थी, ताकि अन्य डिवाइसेज से भी गोपनीय डेटा हासिल किया जा सके।
वायुसेना का कड़ा रुख और कानूनी कार्रवाई
- 30 मई को हुई गिरफ्तारी: राजस्थान के अलवर सैन्य छावनी (Cantt Area) क्षेत्र में चल रहे नियमित निगरानी अभियान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने संदिग्ध मंगल सिंह को हिरासत में लिया। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक पूछताछ और तकनीकी जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी पिछले दो वर्षों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के एजेंटों के साथ सोशल मीडिया के जरिए लगातार संपर्क में था और सामरिक महत्व की जानकारियां साझा कर रहा था। वायुसेना की शिकायत और मिले पक्के सबूतों के आधार पर अधिकारी को 30 मई 2026 को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उसे अदालत द्वारा तिहाड़ जेल (न्यायिक हिरासत) भेज दिया गया।
- जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता ने कहा कि अधिकारी पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी और सबूत मिलते ही उसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने वाली ऐसी किसी भी गतिविधि के खिलाफ बल की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है।
- अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की न्यायिक सुनवाई जारी है, जबकि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस लीक से राष्ट्रीय सुरक्षा को कितना नुकसान पहुंचा था।


