यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समानता और UCC के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा है। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी और उनके समर्थक कुरान और सुन्नत की पैरवी करने वाले लोग हैं और वे BJP-RSS की विचारधारा को स्वीकार नहीं करते।
‘इक्वलिटी’ के नाम पर UCC को लेकर सवाल
ओवैसी ने UCC के संदर्भ में कहा कि BJP बार-बार समानता की बात करती है, लेकिन उनके मुताबिक प्रस्तावित कानून को केवल ‘इक्वलिटी’ के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC के जरिए मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। यह ओवैसी का राजनीतिक आरोप है, जिस पर BJP की ओर से अलग दृष्टिकोण रखा गया है।
ओवैसी ने संविधान के विभिन्न प्रावधानों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों से जुड़े अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 को ध्यान में रखते हुए UCC पर विचार किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, धार्मिक मामलों में समुदायों को अपने नियमों के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
‘हम कुरान और सुन्नत की पैरवी करते हैं’
ओवैसी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक और सामाजिक सोच कुरान और सुन्नत पर आधारित है। उन्होंने कहा कि वह BJP या RSS की विचारधारा की पैरवी नहीं करते। इसी संदर्भ में उन्होंने समानता के मुद्दे पर अपने रुख को सामने रखा और UCC के प्रस्ताव का विरोध किया।
उनका कहना है कि भारत की सामाजिक संरचना बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक है। ऐसे में अलग-अलग समुदायों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों को लेकर किसी एक समान व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और सभी पक्षों की भागीदारी जरूरी है।
अमित शाह के बयान के बाद बढ़ी बहस
UCC पर ओवैसी की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने BJP के नेतृत्व वाले NDA शासित राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने की बात कही है। शाह UCC को संविधान के तहत समान नागरिक कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखते हैं, जबकि ओवैसी और AIMIM इसका विरोध कर रहे हैं।
UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग कानूनों की जगह समान नागरिक नियम लागू करना है। फिलहाल उत्तराखंड में UCC लागू है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी इससे संबंधित विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
इस मुद्दे पर सरकार और विपक्षी दलों के बीच बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। ओवैसी के ताजा बयान ने UCC के साथ-साथ धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और संविधान में निहित अधिकारों को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा को फिर तेज कर दिया है।


