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    रिजल्ट से पहले CM पद के लिए खींचतान, केरल कांग्रेस में दावेदारों की लगी कतार

    केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान (9 अप्रैल) संपन्न होने के बाद अब सबकी नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। लेकिन परिणाम आने से पहले ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के भीतर मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर घमासान तेज हो गया है, जो गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

    कांग्रेस के भीतर कई गुट अपने-अपने नेताओं को अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर रहे हैं, जिससे पार्टी की एकता पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला के समर्थकों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में एर्नाकुलम जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के उस बयान ने विवाद बढ़ा दिया जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री अपने जिले से होने की इच्छा जताई थी।

    वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने खुद को इस दौड़ से औपचारिक रूप से बाहर बताते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री का चयन निर्वाचित विधायकों में से ही होना चाहिए। हालांकि, उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग उन्हें राज्य की कमान सौंपने के पक्ष में रहा है। विवाद बढ़ता देख कांग्रेस आलाकमान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी चुनाव से पहले किसी चेहरे की घोषणा नहीं करेगी। मुख्यमंत्री का फैसला नतीजों के बाद ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया’ (विधायक दल की बैठक) के जरिए लिया जाएगा।


    सहयोगी दलों की चिंता

    यूडीएफ के प्रमुख सहयोगी दल, विशेष रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), कांग्रेस के इस आंतरिक कलह से असहज हैं। सहयोगियों को डर है कि नतीजों से पहले नेतृत्व की यह लड़ाई मतदाताओं के बीच नकारात्मक संदेश दे सकती है, जिसका फायदा सत्तारूढ़ LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) उठा सकता है। इडुक्की जैसी सीटों पर सीट बंटवारे को लेकर ‘केरल कांग्रेस’ (जोसेफ गुट) और कांग्रेस के बीच पहले से ही तनातनी रही है, जिसे मुख्यमंत्री पद के विवाद ने और गहरा कर दिया है।


    केरल चुनाव 2026: मुख्य कार्यक्रम

    घटनातारीख
    मतदान (Poll Date)9 अप्रैल, 2026
    मतगणना (Counting)4 मई, 2026
    विधानसभा का कार्यकाल समाप्त23 मई, 2026

    जहाँ एलडीएफ (LDF) ‘हैट्रिक’ की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं कांग्रेस के लिए असली चुनौती केवल चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि जीत के बाद बिना किसी विद्रोह के नेतृत्व का चयन करना भी होगा। क्या यह आपसी सिरफुटव्वल यूडीएफ की वापसी की संभावनाओं को नुकसान पहुँचाएगी? इसका जवाब 4 मई को ही मिलेगा।

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