महाराष्ट्र में नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य में होने वाले गरबा-डांडिया कार्यक्रमों को लेकर ऐसी गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनमें मुस्लिमों की एंट्री पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसके साथ ही आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान की जांच और हिंदू पहचान सुनिश्चित करने के लिए तिलक लगाने जैसी व्यवस्था करने को कहा गया है। इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
VHP ने क्या कहा?
VHP का तर्क है कि गरबा और डांडिया केवल मनोरंजन या नृत्य का आयोजन नहीं, बल्कि नवरात्रि के दौरान देवी की आराधना से जुड़ा धार्मिक कार्यक्रम है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा कि जब नवरात्रि देवी की पूजा का पर्व है और मुस्लिम समुदाय मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करता, तो उन्हें इन धार्मिक आयोजनों में शामिल क्यों होना चाहिए। संगठन ने आयोजकों से प्रतिभागियों के आधार कार्ड की जांच और माथे पर तिलक लगाने जैसी व्यवस्था करने को कहा है।
VHP का कहना है कि इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों की पहचान और पवित्रता बनाए रखना है। हालांकि, इस कदम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
संजय राउत ने साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने VHP के फैसले पर सवाल उठाते हुए सीधे RSS प्रमुख मोहन भागवत से जवाब मांगा है। राउत ने कहा कि VHP को न्यूयॉर्क में भागवत के हालिया बयान को सुनना चाहिए, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह सच्चा हिंदू नहीं है। राउत का सवाल है कि क्या VHP भागवत के इस विचार से सहमत नहीं है।
राउत पहले भी भागवत के इसी बयान को भारत में लागू करने की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि सामाजिक सौहार्द की बात केवल विदेश में नहीं, बल्कि भारत में भी खुलकर होनी चाहिए।
विपक्ष ने बताया असंवैधानिक
कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) गुट ने भी VHP के निर्देश पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा कि त्योहारों का उद्देश्य समाज में भाईचारा और सद्भाव बढ़ाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में सद्भावना के तौर पर शामिल होते रहे हैं।
एनसीपी (एसपी) प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने सवाल किया कि क्या महाराष्ट्र सरकार ऐसे निर्देशों पर कार्रवाई करेगी या चुप रहेगी। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था चलाने का अधिकार किसी संगठन को नहीं दिया जा सकता।
सरकार और VHP के तर्क पर भी बहस
महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि धार्मिक त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं। उनका कहना है कि किसी आयोजन में किसी को आमंत्रित करना या नहीं करना आयोजकों का निर्णय हो सकता है, लेकिन धर्म के आधार पर सार्वजनिक रूप से ऐसे विवाद खड़े होने से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
फिलहाल विवाद का केंद्र यही सवाल है कि क्या गरबा केवल धार्मिक आयोजन है या इसमें सांस्कृतिक और सामाजिक भागीदारी की भी गुंजाइश है? नवरात्रि नजदीक आने के साथ यह बहस और तेज होने की संभावना है। संजय राउत का मोहन भागवत से जवाब मांगना इस विवाद को सीधे RSS की विचारधारा और VHP के निर्देशों के बीच तुलना तक ले गया है।


