अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। रूस के साथ एक महत्वपूर्ण सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, तालिबान मंत्री ने कहा है कि अब पाकिस्तान या कोई भी अन्य देश अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला करने की हिम्मत नहीं कर सकेगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा (Durand Line) पर तनाव चरम पर पहुंच गया है, और पाकिस्तान ने टीटीपी (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाने के नाम पर अफगान सीमा के भीतर हवाई हमले किए हैं।
रूस-तालिबान रक्षा समझौता: बदलेगा क्षेत्रीय समीकरण
तालिबान सरकार के कार्यवाहक रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब ने हाल ही में रूस का दौरा किया, जहां दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य सहयोग समझौते पर सहमति बनी है। इस समझौते के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- सैन्य प्रशिक्षण और हथियार: रूस अब तालिबान की सेना को आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण और रणनीतिक सहायता प्रदान करेगा।
- तकनीकी सहयोग: अफगानिस्तान के रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए रूस तकनीकी मदद भी मुहैया कराएगा।
- वैश्विक मान्यता की ओर कदम: मॉस्को द्वारा तालिबान को आधिकारिक तौर पर ‘आतंकवादी संगठनों की सूची’ से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद यह समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य रिश्तों को दर्शाता है।
पाकिस्तान को सीधी और तीखी चेतावनी
रूस से लौटते ही मुल्ला याकूब ने पाकिस्तानी नेतृत्व, विशेषकर सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा:
“यदि पाकिस्तान ने भविष्य में अफगानिस्तान की धरती पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई या हवाई हमला करने की हिमाकत की, तो उसे इसका भारी खामियाजा भुगतना होगा। हमारी सेना अब पहले से कहीं अधिक सक्षम है। रूस के साथ हुए नए सुरक्षा समझौते के बाद, अब कोई भी देश हमारी सीमाओं का उल्लंघन करने की हिम्मत नहीं कर सकेगा।”
तालिबान का यह रुख साफ करता है कि रूस का साथ मिलने के बाद उसका हौसला काफी बढ़ गया है, और वह पाकिस्तान की सैन्य धमकियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
क्यों बढ़ रहा है पाक-अफगान तनाव?
पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि प्रतिबंधित संगठन ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर आत्मघाती और गुरिल्ला हमले कर रहा है। पाकिस्तान ने तालिबान से इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन तालिबान ने इसे पाकिस्तान का आंतरिक मामला बताया। इसके बाद पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगान सीमा के भीतर कथित टीटीपी ठिकानों पर बमबारी की थी, जिससे दोनों देशों के रिश्ते युद्ध जैसे मुहाने पर पहुंच गए हैं। अब रूस के इस कदम ने पाकिस्तान की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।


